Saturday, April 25, 2026
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कविता:- खुशियाँ बाँटे-सलीम ‘स्वतंत्र’

“कविता:- खुशियाँ बाँटे”

 

जो अशक्त हैँ, जो निर्धन हैँ

बाँटे उनमें प्यार

आओ उनके बीच मनाएँ

खुशियों का त्यौहार

 

घोर ग़रीबी , घोर निराशा

चेहरों पर दिखती न आशा

आप उन्हें, जो मिल जाएंगे

चेहरे उनके खिल जाएंगे

 

थोड़ी खुशियाँ लेकर जाएं

थोड़ा उन पर स्नेह लुटाएं

जन-सेवा,सच्ची धन-लक्ष्मी

उनके घर भी दीप जलाएं

 

जिन्हें न मिलताअच्छा भोजन

आज मिठाई पा जाएंगे

जीवन में कुछ कमी न होगी

इतनी दुआएं दे जाएंगे

 

ईश्वर ने जो दिया आपको

निर्धन – निर्बल में भी बाँटे

होली-दिवाली,ईद-क्रिसमस

खुशियाँ उनके साथ भी बाँटे

#####

( स्वरचित,मौलिक, अप्रकाशित)

( सलीम “स्वतंत्र” कोटा- राज.)

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