कोटा/बाल साहित्य बच्चों को संस्कारित करता है। उनमें राष्ट्र भक्ति की भावना पैदा करता है।
श्री हिंदी साहित्य समिति कोटा और पश्चिम मध्य रेलवे कोटा मंडल राजभाषा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बाल साहित्यकार सलीम स्वतंत्र वरिष्ठ लोको पायलट की दो पुस्तकें “सबसे अच्छी अपनी रेल, देश हमारा सबसे प्यारा” का मैनल अधिकारी क्लब में भव्य लोकार्पण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप मुख्य वित्त सलाहकार एवं लेखाधिकारी श्री राजकुमार प्रजापति सुशोभित रहे। अध्यक्षता बाल कहानीकार डॉ रघुराज सिंह कर्मयोगी ने की। अति विशिष्ट अतिथि रेलवे के मंडल चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ सुपर्णा सेन राय, डॉ शशि जैन एवं वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही शोभायमान रहे। विशिष्ट अतिथि राजकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ विवेक मिश्रा, वरिष्ठ गजलकार भगवत सिंह मयंक एवं बूंदी के साहित्यकार रामस्वरूप मूंदड़ा रहे।
पत्र वाचन डॉ युगल सिंह ने किया। कार्यक्रम का सफल संचालन वाक पटुता के साथ शब्दों के चितरे राजकीय महा विद्यालय में हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ रामावतार सागर ने किया। सलीम स्वतंत्र की बाल कविताओं का पाठ तारे सेकेंडरी स्कूल के बच्चों “रिमझिम,करण, नितिन, आराध्या और कनिष्क ने सस्वर पाठ किया। जिसे श्रोताओं ने सराहा। मुख्य अतिथि के संबोधन में राजकुमार प्रजापति ने कहा कि साहित्य को लेकर समय कुछ ज्यादा ही आगे चला गया है। खुशी मिलती है, साहित्यकार लिखता है। समाज तक अपने विचार पहुंचाता है। अभिव्यक्ति ऐसी होनी चाहिए कि कविता व्यक्ति की जवान पर चढ़ जाए। माता की लोरियां यही कार्य करती है। जिससे बच्चे सो जाते हैं। पहेलियां बच्चे बूढ़े सभी को पसंद आती हैं।
डा रघुराज सिंह कर्मयोगी ने कहा कि बाल कविता ही है जो बच्चों पर अपना प्रभाव शीघ्र छोड़ती है। इससे उनका चरित्र निर्माण होता है। संस्कार मिलते हैं। उन्हें अपने भविष्य की दिशा तय करने का मार्गदर्शन मिलता है। जिससे देश के अच्छे नागरिक बन सकें। डॉ युगल सिंह ने पत्र वाचन करते हुए कहा कि सोशल मीडिया के डिजिटल युग में नाना नानी की कहानियां सुनना सुनाना पीछे छूट गया है। परंतु सलीम स्वतंत्र ने बाल का साहित्य की दो पुस्तकों की रचना कर उसे जीवंत कर दिया है। उनकी कविताएं बच्चों की मोबाइल पर चिपके रहने की आदत को छुड़ाने की सामर्थ्य रखती हैं। जितेंद्र निर्मोही ने कहा कि बाल कवि तभी सफल है। जब वह बच्चों के मन को पढ़ लेता है। सलीम स्वतंत्र ने बाल कविता की समझ को केंद्र में रखकर सामाजिक विषयों पर कविताएं लिखी हैं।जो निश्चित रूप से उनके लिए प्रेरणादायक हैं।
डॉ सुपर्णा सेन राय ने अपने संबोधन में कहा कि बाल साहित्य संस्कार देता है। बच्चों को आज्ञाकारी बनाता है। सलीम स्वतंत्र 35 वर्ष से रेल गाड़ियां चला रहे हैं। उन्होंने बच्चों के बाल मन के स्तर पर जा कर साहित्य का सृजन किया है। यह उनको आगे बढ़ाने के अनेक द्वार खोलेगा। डॉ रामावतार सागर ने कहा कि कविताओं का प्लेटफार्म मां की लोरियां और घर के आंगन से मोबाइल की ओर शिफ्ट हो गया है। लेकिन सलीम स्वतंत्र की कविताएं साधारण बोल चाल की भाषा में लिखी गई हैं। जिन्हें बच्चा आसानी से आत्मसात कर सकता है। जिस दिन बाल साहित्यकारों का इतिहास लिखा जाएगा सलीम स्वतंत्र को अवश्य स्थान मिलेगा।
तारे स्कूल के बच्चों एवं मंचासीन अतिथियों को लेखक की तरफ से स्मृति चिन्ह,शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया। श्री हिंदी साहित्य समिति कोटा के साहित्यकारों ने सलीम स्वतंत्र का सारस्वत सम्मानित किया। इस अवसर पर कोटा रेलवे स्टेशन डायरेक्टर नंदकिशोर मीणा,दीनानाथ त्रिपाठी, पत्रकार के डी अब्बासी, कालीचरण राजपूत, जमील कुरैशी, वाजिद अली, सुधीन्द्र गौड़ साहित्य कला मंदिर, कमलेश कुमार, सुरेंद्र सिंह गौड़,बिगुल जैन, पुखराज झाला,दीनबंधु मीणा,रमेश अग्रवाल अधीर,हैदर राजस्थानी, हेमराज सिंह हेम,नहुष व्यास, ज्ञान सिंह गंभीर, काव्यांजलि प्रकाशक नवीन गौतम,बनवारी लाल नौरावत,हरी मोहन सिंह,पूरनमल मेहरा,लेखराज मेहरा,रशीद अहमद,फरीद मोहम्मद, सद्दीक खान,मो.सलमान खान, महेंद्र सिंह गौड़, गीतम सिंह. उपस्थित रहे।






