रचनाकर्म भौतिकता से अध्यात्मिकता तक का सफर: डॉ. अर्जुनदेव चारण
कोटा। हाड़ौती के राजस्थानी कवि लेखक चंदालाल चकवाला की कृति “लाड़ो ठेका पै” का भव्य विमोचन समारोह कोटा में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक एवं और प्रख्यात राजस्थानी कवि डॉ. अर्जुन देव चारण ने पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा कि यह पुस्तक भौतिकता से आत्मिकता तक का सफर तय करने वाली एक सशक्त व्यंग्य रचना है। उन्होंने कहा कि इस कृति में मनुष्य की मनुष्यता और संस्कृति को बचाने की गहरी चिंता झलकती है। रामायण और महाभारत का उदाहरण देते हुए डॉ. चारण ने मार्मिक बात कही कि जहाँ रामायण बताती है कि मनुष्य को कैसा होना चाहिए, वहीं महाभारत यह दर्शाता है कि मनुष्य वास्तव में कैसा है।
समारोह में जय मीनेशआदिवासी विश्वविद्यालय, कोटा के कुलगुरु डॉ. श्रवण कुमार मीणा, विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन आर. डी. मीणा ने आदिवासी समाज में साहित्य की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।इस अवसर पर प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों का जमावड़ा रहा, जिनमें तीन पूर्व आईएएस अधिकारी पी. आर. मीणा, जे. पी. मीणा एवं पी. सी. मीणा की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथि पूर्व जिला प्रमुख कमल मीणा ने चकवाला की इस कृति को सामाजिक सुधार की दिशा में एक उत्कृष्ट कदम बताया। कार्यक्रम में कोटा के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि रामकिशन वर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
समारोह का शुभारंभ आर. सी. आदित्य द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जबकि मंच का कुशल संचालन रामनारायण मीणा ‘हलधर’ ने किया। साहित्यकार ओम नागर ने लेखक का परिचय देते हुए चकवाला जी को यथार्थ का चितेरा बताया और सी. एल. सांखला ने पुस्तक का परिचय देते हुए इसमें ‘व्यंजना शब्द शक्ति’ की प्रचुरता को रेखांकित किया। यह संपूर्ण जानकारी कुलदीप विद्यार्थी द्वारा संकलित एवं प्रदान की गई है। पुस्तक का प्रकाशन
सूर्य प्रकाशन मंदिर, बीकानेर द्वारा किया गया है। इस मौक़े पर बड़ी संख्या में लेखक, साहित्यकार उपस्थित थे।






