नैनवां शहर में पिछले 44 वर्षो से बड़ी दिपावली यानी लक्ष्मी पूजन के दूसरे दिन पटाख युद्ध की परम्परा निभाई जाती है, परम्परा की शुरूआत तो पुराने जमाने में बैलो की जोड़िया की पूजन किया जाने की परम्परा थी। किसान पहले अपने घर के सामने सामूहिक पूजन करते थे।
खेतो की हकाई ट्रेक्टर से होने के साथ ही किसानो ने अपने पास बैलो की जोड़िया रखना बंद कर दिया लेकिन अतिशबाजी की परम्परा ने पटाखा युद्ध का रूप ले लिया।
अब शहर के मुख्य बाजार सहित प्रमुख मार्गो पर युवाओ की टोलिया एक दूसरे पर पटाखा फेक कर दीपावली की खुशिया मनाते है। इस पटाखा युद्ध में अब भी कई बार युवा अतिशबाजी से चोटिल हो जाते है, लेकिन दीपोत्सव होने के कारण सब कुछ भूल कर फटाखा युद्ध का आनन्द लेते है। बैलो की दीपावली यानी बड़ी दिपावली की सांय शुरू हॊता जॊ आधी रात तक शहर में फटाखा युद्व होता है। हालाकि पुलिस प्रशासन फटाखा युद्ध को लेकर गश्त पर रहते है, लेकिन करीब तीन चार घंटे तक अब भी पटाखा युद्ध की परम्परा का निर्वाह किया जाता है। साभार – मीडिया सूत्र





