-बिगुल जैन
कोटा/विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस के अवसर पर कोटा स्थित राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय में एक भव्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस अवसर पर लोक संस्कृति और साहित्य का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम में लोक संस्कृति के प्रख्यात रचनाकार डॉ. जगदीश निराला की दो महत्वपूर्ण कृतियों—हिंदी गीत, कविता एवं ग़ज़ल संग्रह “उमंग” तथा राजस्थानी गीत संग्रह “रूपाळी म्हारी मांगरोळ” का विधिवत लोकार्पण वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। पंडित प्रेम शास्त्री ने मंत्रोच्चार संपन्न कराया। डॉ. निराला ने अपने सजीव अभिनय से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सर्वधर्म ग्रंथ पूजा के साथ हुआ। अध्यक्षता ख्यातनाम साहित्यकार जितेंद्र निर्मोही ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में धर्मराज मीणा (अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश, कोटा) उपस्थित रहे। अति विशिष्ट अतिथि विजय जोशी, गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय तथा मुख्य वक्ता प्रो. के.बी. भारतीय सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
स्वागत उद्बोधन में संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने साहित्य की मूलभूत आवश्यकता और रचनाकारों की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता प्रो. के.बी. भारतीय ने लोक-संपृक्त साहित्य की सहजता को रेखांकित करते हुए इसे समाज से जुड़ा बताया। वहीं विजय जोशी ने डॉ. निराला के साहित्य में आमजन की पीड़ा और लोकभावना के सशक्त चित्रण की सराहना की।
डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि ये कृतियाँ भारतीय संस्कृति और लोकगीत परंपरा की जीवंत धरोहर हैं, जो युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने महाराणा प्रताप, पन्ना धाय और बंदा वैरागी जैसे वीरों का स्मरण करते हुए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि धर्मराज मीणा ने इस दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यूनेस्को द्वारा वर्ष 1995 से हर साल 23 अप्रैल को विलियम शेक्सपियर और मिगुएल डे सर्वेंट्स के सम्मान में यह दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कॉपीराइट कानूनों की जानकारी भी दी।
कार्यक्रम में साहित्यिक योगदान के लिए कई हस्तियों को “सृजन शिखर सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया, जिनमें धर्मराज “भारत”, जितेंद्र निर्मोही, विजय जोशी, के.बी. भारतीय सहित अनेक साहित्यकार शामिल रहे। वहीं श्रेष्ठ लेखकीय योगदान के लिए डॉ. अतुल चतुर्वेदी, प्रेम शास्त्री, विष्णु शर्मा ‘हरिहर’, महावीर सेन सहित कई रचनाकारों को सम्मानित किया गया।
अंत में डॉ. शशि जैन ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार नहुष व्यास ने किया। आयोजन के बाद अतिथियों ने पुस्तकालय का भ्रमण भी किया। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों और बुद्धिजीवियों के लिए प्रेरणादायी साबित हुआ, जिसने पुस्तकों के प्रति रुचि और जागरूकता को नई दिशा दी।
















