Sunday, July 12, 2026
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मायड़ भाषा सर्वोपरि, संस्कृति की आत्मा है – डॉ. अर्जुनदेव चारण, सूर्य मंदिर बूढ़ादीत में ‘सैनाणी’ ई-पत्रिका का लोकार्पण

कोटा/सूर्य मंदिर बूढ़ादीत में मायड़ भासा साहित्य संस्कृति मंच एवं हाड़ीराणी राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृति समिति के संयुक्त तत्वावधान में भव्य साहित्य संवाद एवं राजस्थानी ई-पत्रिका ‘सैनाणी’ का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के राजस्थानी परामर्श मंडल संयोजक डॉ. अर्जुनदेव चारण रहे, जबकि अध्यक्षता मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. नरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सरस्वती वंदना कवि विष्णु विश्वास ने प्रस्तुत की। स्वागत उद्बोधन सी.एल. सांखला ने दिया एवं अतिथियों का सम्मान किया गया।

अपने मुख्य व्याख्यान में डॉ. अर्जुनदेव चारण ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पौराणिक नाम मां के नाम पर रखे जाते रहे हैं। जैसे मां का स्थान सर्वोपरि है, वैसे ही मायड़ भाषा का महत्व भी सर्वोच्च है। हमारी संस्कृति मायड़ भाषा से ही जीवित रहती है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. नरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि लोक बोलियां ही शब्दों को सशक्त बनाती हैं और इन्हीं से लोक संस्कृति का अस्तित्व कायम रहता है।

इस अवसर पर ‘सैनाणी’ ई-पत्रिका के मुख्य संपादक देवकी दर्पण ने पत्रिका की रूपरेखा प्रस्तुत की, वहीं साहित्य अकादमी परामर्श मंडल सदस्य चंदालाल चकवाला ने हाड़ौती में राजस्थानी भाषा साहित्य की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ साहित्यकारों अम्बिकादत्त, डॉ. क्षमा चतुर्वेदी, ओम सोनी ‘मधुर’ सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

🏅 सम्मान एवं अलंकरण:

समारोह में डॉ. नरेंद्रनाथ चतुर्वेदी को ‘श्री आदित्य रत्न’, डॉ. क्षमा चतुर्वेदी को ‘आदित्य प्रभा सम्मान’ तथा चंदालाल चकवाला को विशेष सम्मान से अलंकृत किया गया।

राजस्थानी भाषा के लिए समर्पित कार्य करने वाले जय सिंह आशावत, रघुराज कर्मयोगी, रविंद्र बिकावत, देवकी दर्पण, चौथमल प्रजापति, रामस्वरूप रावत सहित कई साहित्यकारों को मायड़ भाषा सम्मान प्रदान किया गया। वहीं मनीष मेहरा, दीपेश सुमन, महावीर धन्वंतरि, सत्यप्रकाश गौतम, पप्पू मेघ को हाड़ीराणी राजस्थानी भाषा साहित्य सम्मान से नवाजा गया।

सेवानिवृत्त शिक्षक बिरधीलाल मालव एवं ओमप्रकाश मीणा को आदर्श शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। साथ ही टाकरवाड़ा एवं बूढ़ादीत के मेधावी विद्यार्थियों वर्षा गोचर, वंशिका गोचर, पायल मेघवाल, योगिता सुमन सहित अन्य को प्रतिभा सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक साहित्यकार, कवि, रचनाकार एवं बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. नंदकिशोर महावर ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन आर.सी. आदित्य ने दिया।

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