Monday, October 12, 2026
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कुछ दोहे,,,,,,,शकूर अनवर 

कुछ दोहे,,,,,,,

शकूर अनवर

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चतुर, स्वार्थी लोग सब, रहते हैं हुशियार।

भोले-भाले आम जन, सहते अत्याचार।।

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किसको हम अपना कहें,किसको समझें ग़ैर”।

राजनीति के खेल में, मची हुई अन्धेर।।

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रोक सको तो रोक लो, ख़ूब लगालो ज़ोर।

नया सवेरा आयेगा, नई उगेगी भोर।।

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शकूर अनवर

ग़ैर*अन्य,दुश्मन

9460851271

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