Friday, August 14, 2026
Screenshot_2026-02-16-14-04-33-20_6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

भला मनख सूं भायली -दुर्गाशंकर बैरागी ‘वैष्णव’

भला मनख सूं भायली

———————————————

मनख पणा सूं चालणो,छोकी पकड़ गडार।

हाथ जोड़ अरजी करां,लगा सांवरा पार।।

 

सदां सांच को साथ दां,माना कोनै हार।

मान बदै सा आपणो,लोग करै मनवार।।

 

लोग कुटम नै तोड़ दै,जद बी लागै वार।

सोच समझ कै चालणो,नीतर होवै हार।।

 

कपट जाळ सूं फांस लै,करै घात पै घात।

गरज खाड कै बापजी,फेर मार दै लात।।

 

जाळी लोग पछांण कै,छोडो वांको साथ।

भला मनख सूं भायली,पकड़ो वांको हाथ।।

 

बपता बीरा झेलणी,पटकै मती नसास।

पतझड़ पाछै पानड़ा,ऊंपै कर बसवास।।

 

दूजां को सुख देख कै,खामी पाड़ां बा’र।

करां कमाई धाप कै,खचै अणद का तार।।

 

आखै दन रोता फरै,दनभर काटै घास।

रोटी मांगण भायला,फोकट तोड़ै गास।।

 

दनड़ो तो म्हूं काट लूं,कटै कोइनै रात।

खींसू खेवूं पीव सा,म्हारा मन की बात।।

 

डील ऊजळो सोवणो,कपट भरी मुसकान।

बगलो खावै माछळ्यां,देखो ईंकी तान।।

 

दांत खाड कै हांसज्या,नेण करै सा वार।

साध निसाणो कामणी,छोकी मारै मार।।

 

करण बीर दानी घणो,दुरयोधन की लार।

रथड़ो धसग्यो कपट सूं,पड़्यो धरा पै जार।।

रचनाकार-दुर्गाशंकर बैरागी ‘वैष्णव’

शिवपुरा,कोटा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles