कुछ दोहे,,,,
शकूर अनवर
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दुनियादारी का मियाँ, ये कैसा अंदाज़।
उनको ख़ुश रखना पड़ा,जिनसे था नाराज़।।
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अब तो अपने देश की,बनी है ये पहचान।
जीना मुश्किल हो गया,मरना है आसान।।
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सहमी सहमी ज़िंदगी, हर कोई लाचार।
हाथों में रख हाथ को, बैठी है सरकार।।
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शकूर अनवर
9460851271






