Thursday, April 23, 2026
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अर्जुन द्वारा प्रभु को नमस्कार- कालीचरण राजपूत

अर्जुन द्वारा प्रभु को नमस्कार

 

प्रभु के बहु रूपों में से, हो उग्र रूप में कौन ?

आप स्वयं बताइए, हम सब रहते मौन ।।

हम सब की जिज्ञासा है,जानें आपका तत्व ।

बार-बार नमस्कार है, अब तो बताओ सत्य ।

 

प्रभु से है मेरी विनती, आप माने प्रश्न या शंका ।

पितरों की कुरु भूमि में, अर्जुन वीर है बंका ।।

उग्र रूप है आपका, आप हैं देवों में से कौन ?

मैं तो अति तुच्छ हूं, आपको जान न पाए द्रोण ।।

 

समझ नहीं कुछ आ रहा, चिंता में है पार्थ ।

समझें कैसे रूप को? अब तुम ही बताओ सार्थ ।।

समझ नहीं पा रहा मैं, प्रभु नमन करो स्वीकार ।

तरह-तरह के रूप क्यों ? आप किए स्वीकार ।।

 

अति भयंकर रूप में, प्रकट हुए क्यों आप ?

कौरवजन या धर्म पक्ष, निगल रहे क्यों आप ?

साफ बताएं हमें प्रभु, क्यों प्रविष्ट हो रहे वीर ?

क्षत्रिय तब मुख गमन से, मन हो रहे अधीर ।।

मन हो रहे अधीर,…

मन हो रहे अधीर….

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