बिना गुरु के ज्ञान न मिलता
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गुरु-कृपा से ही हर सम्भव,
ज्ञान-पुष्प उसी से खिलता ।
अन्तर-तिमिर मिटाये गुरुवर,
बिना गुरु के ज्ञान न मिलता ।।
गुरु-कृपा से ही हर सम्भव …..
अज्ञान की ग्रन्थि जो खोले,
ग्यान-प्रकाश सदा फैलाये ।
परमार्थ का भाव जगा वह,
परब्रह्म से नित्य मिलाये ।।
बिन उसके सत्संग न मिलता,
बिना गुरु के ज्ञान न मिलता ।
एक अच्छा इन्सान बनो तो,
गुरु-प्रसाद अतिआवश्यक ।
शाश्वतता के पाठ हेतु जो,
सद्गुरु है परमावश्यक ।।
बिन उसके हर मोह में पिलता,
बिना गुरु के ज्ञान न मिलता ।
मानव-जीवन मिला तो प्यारे,
शुभावसर का लाभ उठाओ ।
अज्ञानता का भूत भगा कर,
तत्व-ज्ञान मन में बैठाओ ।।
मार्गदर्शक ऐसा न मिलता,
बिना गुरु के ज्ञान न मिलता ।
ज्ञान-कृपा से ही हर सम्भव,
ज्ञान-पुष्प उसी से खिलता ।
अन्तर-तिमिर मिटाये गुरुवर,
बिना गुरु के ज्ञान न मिलता ।।
# स्वरचित/मौलिक/सर्वाधिकार सुरक्षित
# बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”,
कोटा (राजस्थान)





