Saturday, May 2, 2026
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कोचिंग की ‘नीट से पहले नीट’ पूरी… अब असली परीक्षा में माता-पिता बच्चे के मन की प्रीत है जरूरी 

22 लाख से ज्यादा सपने… पर सरकारी सीट सिर्फ 60 हजार नीट अभ्यर्थियों का मानसिक दबाव चरम सीमा पर 

डॉ. नयन प्रकाश गांधी पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट ,एलुमनाई आईआईपीएस मुंबई ,करियर एक्सपर्ट , एनएलपी लाइफ कोच

भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अब सिर्फ एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गहन मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक परीक्षा बन चुकी है। विशेष रूप से नीट जैसे बड़े एग्जाम के संदर्भ में, हर साल लाखों छात्र अपने घरों से दूर, एक बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर कोचिंग शहरों का रुख करते हैं।लेकिन इस चमकते लक्ष्य के पीछे एक सच्चाई छुपी है।

अत्यधिक दबाव, अकेलापन और मानसिक तनाव, जो कई बार भयावह परिणामों में बदल जाता है।

समस्या की गहराई

एक छात्र जब अपने परिवार से दूर किसी हॉस्टल के छोटे से कमरे में रहता है, तो वह सिर्फ किताबों से नहीं लड़ रहा होता, बल्कि लड़ रहा होता है असफलता के डर से,परिवार की अपेक्षाओं से,लगातार तुलना और प्रतिस्पर्धा से और सबसे बड़ी बात अकेलेपन से ,और अब कोचिंग में लगातार प्रतिस्पर्धात्मक रूप से हो रही नीट से पहले नीट मॉक टेस्ट के प्राप्त स्कोर से ,बालक की दिनचर्या में “सब ठीक है” एक सामान्य जवाब बन जाता है, जबकि भीतर बहुत कुछ टूट रहा होता है।

अभिभावकों की भूमिका

आज के डिजिटल युग में माता-पिता यह मान लेते हैं कि मोबाइल पर नियमित बातचीत ही पर्याप्त है। अंतराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई विश्विद्यालय के एलुमनाई नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि भावनात्मक उपस्थिति का कोई विकल्प नहीं है।बच्चे की आवाज़ में बदलाव को समझना,समय-समय पर व्यक्तिगत रूप से मिलना,परीक्षा के एक सप्ताह पूर्व कोचिंग के सभी मॉक टेस्ट के समय किसी भी परिजन को साथ रहना ,बिना शर्त समर्थन देना ये केवल विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारियाँ हैं, आज के बेहतरीन पेरेंटिंग के लिए अनिवार्यता है हर बच्चे को यह भरोसा चाहिए,“परिणाम चाहे जो हो, हम तुम्हारे साथ हैं।”

हॉस्टल और मैस संचालकों की जिम्मेदारी

हॉस्टल और मैस सिर्फ रहने-खाने की व्यवस्था नहीं हैं, वे छात्रों का दूसरा घर होते हैं।अचानक व्यवहार में बदलाव,कमरे में अलग-थलग रहना,भोजन और नींद में गिरावट ये संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।एक साधारण संवाद,“सब ठीक है?”कभी-कभी जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क बन सकता है।

सुरक्षा कर्मियों और स्टाफ की सतर्कता

कोचिंग हो या हॉस्टल के सुरक्षा गार्ड और अन्य कर्मचारी छात्रों की दिनचर्या के सबसे करीब होते हैं।उनकी एक जागरूक नजर,असामान्य गतिविधियों को पहचान सकती है,समय रहते सूचना दे सकती है,और एक बड़ी त्रासदी को टाल सकती है

कोचिंग संस्थानों की भूमिका

शिक्षण संस्थान केवल पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए नहीं हैं।उनकी जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को यह समझाएं परीक्षा जीवन का अंतिम सत्य नहीं है,असफलता एक प्रक्रिया है, अंत नहीं,मानसिक स्वास्थ्य, अकादमिक सफलता जितना ही महत्वपूर्ण है, एनएलपी कोच डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि यही नहीं जिन भी कोचिंग संस्थानों में नीट से पहले नीट पूरे प्रतियोगी माहौल में आयोजित हुई है उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग का बारीकी परीक्षण करते हुए ,पेपर देते हुए उनके हाव भाव ,उनके अंतर्मन की उत्तेजना ,तनाव आदि को चेहरे के एक्सप्रेशन देखकर भापा जा सकता है ,उन बच्चों से मेंटल स्ट्रेस मेंटरशिप टीम बात कर उन पर नजर रख उन्हें हौसला प्रदान कर सकती है ,ज्यादा इमोशनल डाउन है बच्चा तो उनके माता पिता को सूचित किया जा सकता है यह सभी केयरिंग स्टेप्स कोचिंग के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अंतिम नीट परीक्षा के से एक दिन पूर्व कोचिंग संस्थानों द्वारा हर फेकल्टी स्टाफ ,हर सहयोगी वेंडर सभी के द्वारा बच्चों के एक्जाम के शुभकामनाओं के साथ मोटिवेशन भरा ,समर्पण भरा ,सहयोग भरा संदेश भी सोशल मीडिया से अगर प्रसारित किया जाए तो कई हद तक बच्चे पेरेंट्स के मध्यस्थ जागरूकता जिम्मेदारी दर्शाई जा सकती है ,इससे सकारात्मकता के साथ बच्चों में अपनत्व पैदा होता है।

सबसे संवेदनशील समय

परीक्षा के दिन और परिणाम के बाद का समय अत्यंत संवेदनशील होता है। इस दौरान,बच्चों को अकेला न छोड़ें,उनकी भावनाओं को गंभीरता से लें,तुलना और आलोचना से बचें,क्योंकि कई बार एक क्षणिक निराशा, स्थायी निर्णय में बदल जाती है।

 एक सामूहिक जिम्मेदारी

यह समस्या किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं है।यह एक सामूहिक उत्तरदायित्व है—अभिभावक,हॉस्टल और मैस संचालक,कोचिंग संस्थान और समाज का हर जागरूक नागरिक सबको मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जहाँ छात्र न केवल सफल हों, बल्कि सुरक्षित भी रहें।कोई भी परीक्षा जीवन से बड़ी नहीं होती।अगर हम समय रहते संवेदनशील और सतर्क हो जाएं,तो कई जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं।यह सिर्फ एक अपील नहीं,बल्कि एक आवश्यक चेतावनी है,अब जागने का समय है।

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