Tuesday, August 11, 2026
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प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास आनंद मठ पर परिचर्चा कार्यक्रम संपन्न

कोटा/भगवान नृसिंह जयंती के पावन अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद एवं सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय के संयुक्त तत्वावधान में प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी कालजयी उपन्यास *आनंदमठ* पर मंडल पुस्तकालय में परिचर्चा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम  विमला डूंकवाल (कुलगुरु कृषि विश्वविद्यालय कोटा) के मुख्य आतिथ्य एवं महेश विजय की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। विष्णु शर्मा हरिहर (अध्यक्ष चित्तौड़ प्रांत) विशिष्ट अतिथि रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

राम गोपाल गौतम ने सरस्वती प्रार्थना का गायन किया।

स्वागत भाषण में डा. दीपक कुमाऱ श्रीवास्तव संभागीय पुस्तकालयाध्यक्ष ने मंचासीन सभी अतिथि गणों एवं सहभागी साहित्यकारों का अभिवादन एवं अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर बल दिया।

परिचर्चा कर्ताओं में

योगीराज योगी ने आनंद मठ में सामाजिक यथार्थ विषय पर अपने विचार प्रकट करते हुए वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता का उल्लेख किया।

डॉ०नील प्रभा नाहर ने आनंदमठ के माध्यम से सामाजिक एवं राष्ट्रीय चेतना के जागरण के साथ माता: भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या के भाव की प्रासंगिकता पर बल देते हुए मातृत्व का विस्तार एवं स्वतंत्रता आंदोलन में मातृ शक्ति का योगदान विषय पर प्रेरणादायी विचार प्रकट किये।

परिचर्चा में संभागी

सत्येंद्र वर्मा ने उपन्यास में सन्यासी विद्रोह को योद्धा के रूप में चित्रण करते हुए प्रकृत वैष्णव धर्म की व्याख्या की।

मुख्य अतिथि कुलगुरु विमला डूंकवाल ने आनंद मठ में मातृ शक्ति की भूमिका का वर्णन करते हुए कहा कि भारतीय जीवनमूल्यों एवं सनातन धर्म के रक्षा में नारी शक्ति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, उन्होंने मातृ शक्ति को परिवारों में संस्कार संवर्धन एवं अपने जीवन मूल्यों की स्थापना का आव्हान किया।

विशिष्ट अतिथि विष्णु शर्मा हरिहर ने आनंद मठ उपन्यास के माध्यम से मानवता के मानक की स्थापना एवं वंदे मातरम के माध्यम से भारत माता की शस्य श्यामला छवि की संकल्पना को प्रस्तुत किया।

अध्यक्षता करते हुए महेश विजय ने ग्रंथ परिचर्चा विषय में अधिकांश संभागियों की सहभागिता पर बल देते हुए अपने विचार प्रकट किये।

कार्यक्रम का संयोजन राजेंद्र मोरपा द्वारा किया गया।

परिचर्चा कार्यक्रम में कोटा महानगर के ख्याति प्राप्त साहित्यकार रघुनंदन हठीला, गिरिराजआनंद,राम मोहन कौशिक, कालीचरण राजपूत,रामगोपाल गौतम,दुर्गा शंकर वैष्णव, मुकुट मणिराज, बाबू बंजारा, रेखा पंचोली, रमा शर्मा,राम शर्मा कापरेन, हेमराज सिंह हेम, राधेश्याम शर्मा, रामस्वरूप शर्मा, इत्यादि साहित्यकारों ने अपनी गरिमामय उपस्थिति प्रदान की। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के द्वारा किया गया।

 

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