Wednesday, September 23, 2026
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हिंदी दिवस पखवाड़े के अन्तर्गत बच्चों ने रचनात्मक प्रतिभा दिखाई

हिंदी दिवस पखवाड़े के अन्तर्गत बच्चों ने रचनात्मक प्रतिभा दिखाई

कोटा, 23 सितम्बर। दिव्य हिंदी संस्थान, महावीर नगर तृतीय, कोटा द्वारा हिंदी दिवस पखवाड़ा के अवसर पर विभिन्न साहित्यिक एवं रचनात्मक स्लोगन, अनुच्छेद लेखन, पोस्टर, प्रतियोगिता निबंध लेखन गतिविधियों का भव्य आयोजन एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थीयों को पुरस्कार वितरित के साथ हुआ।

एम. बी. आई स्कूल महावीर नगर प्रथम में आयोजित विभिन्न हिंदी प्रतियोगिताओं में निबंध लेखन में आशा मालवीय प्रथम, संजू द्वितीय और डोली तृतीय स्थान पर रही, पोस्टर डिजाइन में राधिका देव ने स्थान पाया। स्लोगन लेखन मे ओजस्वी प्रथम ,दीपिका, दिया कुमारी द्वितीय, अनुच्छेद लेखन लक्षिता, रोशन तथा कविता लेखन में रक्षिता ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

शाला प्रभारी अनिल विजय ने हिंदी भाषा के वर्तमान परिपेक्ष में महत्व पर प्रकाश डाला।

संस्थान के अध्यक्ष धनेश विजयवर्गीय ‘दिव्य’ ने बताया कि हिंदी को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि संस्कार और गर्व का विषय बनाने के उद्देश्य से इस वर्ष कई नवाचारी आयोजन किए गए।

आयोजित प्रमुख गतिविधियाँ:

1. “मेरी मातृभाषा” पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता: शहर के विभिन्न विद्यालयों के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया, जहाँ देवनागरी लिपि के महत्व को रेखांकित करते सुंदर पोस्टर बनाए गए।

2. विद्यालयी निबंध प्रतियोगिता:* विषय था – “सोशल मीडिया में हिंदी – चुनौती या अवसर”। विद्यार्थियों ने तर्कपूर्ण ढंग से हिंदी के डिजिटल भविष्य पर अपने विचार रखें संस्थान के संरक्षक श्री राजेश कृष्ण बिरला ने अपने संदेश में कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति संस्कारों साहित्य और भावनाओं को व्यक्त करने का मूल आधार है। श्री बिरला ने कहा, “दिव्य हिंदी संस्थान हिंदी के लिए जो कार्य कोटा में कर रहा है, वह अनुकरणीय है। हिंदी को रोजगार और तकनीक से जोड़ना ही समय की माँग है।”

संस्थान अध्यक्ष धनेश विजयवर्गीय ‘दिव्य’ ने अपने उद्बोधन में कहा – “हिंदी केवल राजभाषा नहीं, हमारी माँ की भाषा है। जब तक हम देवनागरी को नहीं बचाएंगे, तब तक हिंदी को बचाने की बात अधूरी है। हमने तीन संकल्प लिए हैं – रोज एक वाक्य देवनागरी में लिखना, बच्चों को एक कहानी हिंदी में सुनाना और हिंदी को गर्व का विषय बनाना।”

इस अवसर पर शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

 

 

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