जिला कलेक्टर ने मोशन एजुकेशन के स्टूडेंट्स संग मनाई दीपावली, पटाखे चलाकर बांटी खुशियां
– पढ़ाई के तनाव, नींद, ओवर थिंकिंग और एकाग्रता जैसे सवालों पर विद्यार्थियों से किया खुला संवाद
कोटा।परीक्षा का दबाव, अच्छे अंक लाने की चिंता, पढ़ा हुआ भूल जाने का डर या फिर पढ़ाई के दौरान एकाग्रता की कमी… प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के मन में ऐसे कई सवाल और उलझनें होती हैं। मंगलवार को कोटा जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने मोशन एजुकेशन के द्रोणा-2 कैम्पस में विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर न केवल इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि उनके साथ दीपावली की खुशियां भी साझा कीं। अधिकारियों और विद्यार्थियों के बीच यह मुलाकात पढ़ाई की चुनौतियों पर खुलकर बातचीत और त्योहार के उल्लास का अनूठा संगम रही।
दीपावली मिलन कार्यक्रम में पहुंचे जिला कलेक्टर सामरिया ने विद्यार्थियों से सहज अंदाज में बातचीत की। इस दौरान आईआईटी बॉम्बे से ग्रेजुएट सामरिया के साथ प्रशिक्षु आईएएस सृष्टि और उत्कर्ष भी मौजूद रहे। तीनों अधिकारियों ने विद्यार्थियों के बीच बैठकर उनकी दिनचर्या, पढ़ाई के दबाव और मानसिक तनाव से जुड़े सवाल सुने। स्टूडेंट्स ने भी बिना झिझक अपनी परेशानियां साझा कीं। सामरिया ने कैम्पस के माहौल की तारीफ करते हुए कहा कि यहां काफी एनर्जी है। कार्यक्रम में मोशन एजुकेशन के फाउंडर एवं एजुकेटर नितिन विजय और डायरेक्टर डॉ. स्वाति विजय भी मौजूद रहे।
नींद पूरी होगी तो पढ़ाई भी बेहतर होगी
संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने ज्यादा नींद आने और पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाने की समस्या रखी। इस पर कलेक्टर ने कहा कि पढ़ाई के साथ पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही जरूरी है। नींद के दौरान शरीर और दिमाग को आराम मिलता है तथा शरीर खुद को रिकवर करता है। ऐसे में नींद को पढ़ाई में बाधा नहीं समझना चाहिए। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि सोते-सोते पढ़ने से बेहतर है कि अच्छी तरह सो लिया जाए। पर्याप्त आराम के बाद दिमाग अधिक सक्रिय रहेगा और पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
भूलने के डर का इलाज नियमित प्रैक्टिस
परीक्षा के समय पढ़ा हुआ भूल जाने की आशंका, ओवर थिंकिंग और एकाग्रता नहीं बन पाने जैसे सवालों पर सामरिया ने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास और टेस्ट देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि परीक्षा से पहले भूलने का डर लगना सामान्य है, लेकिन इससे घबराने के बजाय अपनी तैयारी पर भरोसा रखना चाहिए। नियमित टेस्ट से न केवल तैयारी का आकलन होता है, बल्कि कमजोरियों को पहचानकर उन्हें सुधारने का मौका भी मिलता है। अनावश्यक चिंताओं में उलझने के बजाय अपने प्रयासों और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
खानपान और दिनचर्या भी है जरूरी
हॉस्टल के खाने के स्वाद और खानपान से जुड़ी परेशानियां भी विद्यार्थियों ने अधिकारियों के सामने रखीं। इस पर कलेक्टर ने जंक फूड से दूरी बनाने और सेहत का ध्यान रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में केवल घंटों पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। अच्छी सेहत, संतुलित खानपान, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या भी सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं।
पटाखे चलाए, स्टूडेंट्स के साथ साझा की दीपावली की खुशियां
पढ़ाई और विद्यार्थियों की समस्याओं पर बातचीत के बाद कार्यक्रम का माहौल दीपावली के उल्लास में बदल गया। जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया, प्रशिक्षु आईएएस सृष्टि और उत्कर्ष ने विद्यार्थियों के साथ दीपावली मनाई। अधिकारियों ने स्टूडेंट्स के साथ पटाखे चलाए और त्योहार की खुशियों में शामिल हुए। इस दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह नजर आया। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बीच पाकर स्टूडेंट्स ने भी उनसे खुलकर बातचीत की और यादगार पल साझा किए।





