मनोरोग.. परिजन शीघ्र पहचाने, स्वीकार करें, इलाज कराएं… डॉ एम एल अग्रवाल
भारतसिंह चौहान ✍️
कोटा/विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी अग्रवाल न्यूरो सायकेट्री सेंटर एवं होप सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई जिसमें मनो रोग से पीड़ित, उनके परिजन, केयरटेकर स्टाफ, होप सोसायटी काउंसलर्स, डॉक्टर विशेषज्ञ, सुपरिटेंडेंट डॉ गिरधर गुप्ता, होप सोसायटी के कोषाध्यक्ष अध्यक्ष अनिल अग्रवाल की उपस्थिति में अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ एवं होप सोसायटी के अध्यक्ष डॉ एम एल अग्रवाल ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के साथ जुड़े हुए स्टिग्मा की वजह से मानसिक स्वास्थ्य प्रमोशन नहीं हो पा रहा था अतः विश्व मानसिक स्वास्थ्य संगठन के द्वारा 1991 में वैश्विक तौर पर 4 से 10 अक्टूबर तक मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह मनाया जाने लगा। 10 अक्टूबर को मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है जिसके लिए प्रत्येक वर्ष एक थीम दिया जाता है जिस पर वैश्विक स्तर पर प्रमोशनल मैटेरियल तैयार किया जाता है जिसे पूरे विश्व में वितरित किया जाता है जिसका हिंदी रूपांतरण डॉक्टर एमएल अग्रवाल एवं डॉक्टर अरुणा अग्रवाल द्वारा नियमित किया जाता रहा है। मानसिक स्वास्थ्य में अक्सर लोग बीमारी के बारे में समझते हैं कि यह पागल (साइकॉटिक) हो गया है जबकि मानसिक बीमारिया अनेक प्रकार की होती है। साइकॉटिक लक्षण केवल एक दो बीमारियों में होते हैं बाकी बहुत साधारण बीमारियां जैसे तनाव, अवसाद, ओसीडी, नशे की प्रवृत्ति, यौन डिसऑर्डर्स, पैनिक डिसऑर्डर्स, कन्वर्जन डिसऑर्डर, डिसोसिएटिव डिसऑर्डर, एडजेस्टमेंट डिसऑर्डर व आजकल इंटरनेट एडिक्शन इत्यादि होते हैं जबकि कुछ एब्नार्मल व्यवहार के लक्षण बाइपोलर मेनिया एवं स्किजोफ्रेनिया में आते हैं। यह स्टिग्मा दूर करने के लिए जन संवाद आवश्यक है इसी के अंतर्गत आज की गोष्ठी आयोजित की गई । मानसिक बीमारियों के लिए आवश्यक है कि सबसे पहले लक्षणों को जल्दी पहचाने, पहचान कर उनको माने और मानकर शीघ्रतम निर्णय लेना और सही इलाज कराना तथा ठीक होने के उपरांत बराबर लंबे समय तक डॉक्टर की सलाह अनुसार चिकित्सा कराना आवश्यक है कई बार देखा गया है कि कुछ बीमारियों में रोगी को गंभीर स्थिति में आंतरिक क्षति हो जाती है जिस कारण मरीज अपने आप को बीमार नहीं मानता इलाज नहीं कराता ऐसे वक्त में फैमिली मेंबर्स केयरटेकर द्वारा लिया गया निर्णय रोगी की लाइफ को प्रभावित करता है स्किजोफ्रेनिया जैसी बीमारियों में नेगेटिव लक्षण अधिक होते हैं पर मरीज के परिजन भी इलाज को ज्यादा महत्व नहीं देते जिस कारण मरीज में पर्सनैलिटी रिवर्स हो जाता है और इलाज से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता। इस वर्ष के थीम के अनुसार परिजनों एवं मरीजों से उनके अनुभव मांगे गए जिसमें मरीजो ने कहा कि इलाज में नियमित फॉलोअप के कारण जीवन बिल्कुल ठीक हो गया है तथा वो अपने कार्यों को सुचारू रूप से कर रहे हैं नौकरियां कर रहे हैं।
प्रेस समन्वयक सुधीन्द्र गौड़ ने बताया कि एएनपीसी सुपरिटेंडेंट डॉ गिरधर गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य में अग्रवाल न्यूरो सायकेट्री सेंटर की विशेषज्ञ सुविधाओं के साथ साथ स्कूल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम में ऑस्ट्रेलिया अमेरिका की तरह ही लागू होना चाहिए कोचिंग और स्कूलों में मेंटल हेल्थ स्क्रीनिंग प्रोग्राम गेट कीपर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम, होना चाहिए। होप सोसायटी के कोषाध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने होप सोसायटी की प्रभावशाली सेवाओं 24 घंटे उपलब्धता जो कि पूर्ण रूप से निशुल्क है के बारे में बताया एवं 0744 2333777 फोन पर सूचित करने पर होप समिति की कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी दी। संगोष्ठी के अंत में उपस्थित श्रोताओं से उनके अनुभव के बारे में जानकारी ली एवं उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।






