स्काउट-गाइड : सेवा, अनुशासन और संस्कारों की पाठशाला
7 नवम्बर स्काउट-गाइड स्थापना दिवस पर विशेष लेख
स्काउटिंग केवल एक संगठन नहीं, बल्कि जीवन जीने की ऐसी कला है, जो बच्चों एवं युवाओं में अनुशासन, आत्मनिर्भरता, नेतृत्व क्षमता, सहयोग, राष्ट्रप्रेम और मानव सेवा के संस्कार विकसित करती है। स्काउट-गाइड का मूल मंत्र सेवा है। यह संगठन युवाओं को अच्छा नागरिक बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध भी कराता है। प्रतिवर्ष 7 नवम्बर को भारत में स्काउट-गाइड स्थापना दिवस मनाया जाता है।
स्काउटिंग का इतिहास एवं स्थापना
स्काउटिंग आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1907 में इंग्लैंड में लॉर्ड रॉबर्ट बेडेन पॉवेल ने की थी। भारत में इसकी शुरुआत वर्ष 1909 में हुई। स्वतंत्रता के बाद विभिन्न स्काउटिंग संगठनों को एकजुट करने की पहल हुई और 7 नवम्बर 1950 को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स का गठन किया गया। इसके बाद 15 अगस्त 1951 को गर्ल गाइड्स का भी इसमें विलय हुआ। आज यह देश का प्रमुख स्वैच्छिक, गैर-राजनीतिक एवं शैक्षिक संगठन है।
व्यक्तित्व विकास की अनूठी पाठशाला
स्काउटिंग का आधार ईश्वर एवं धर्म के प्रति कर्तव्य, दूसरों के प्रति कर्तव्य तथा स्वयं के प्रति कर्तव्य जैसे सिद्धांतों पर टिका है। स्काउट प्रतिज्ञा और नियमों के माध्यम से बच्चों में ईमानदारी, विनम्रता, सहयोग, समय की पाबंदी और सेवा के संस्कार विकसित किए जाते हैं। शिविरों, रैलियों, पदयात्राओं, प्राथमिक सहायता, दिशा ज्ञान एवं साहसिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है। स्काउटिंग उन्हें विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखने और टीम भावना से कार्य करना सिखाती है।
समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण में योगदान
स्काउट-गाइड संगठन का सबसे बड़ा परिचय उसकी सेवा गतिविधियां हैं। प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, दुर्घटनाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में स्वयंसेवक प्रशासन एवं आमजन की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। मेले, धार्मिक आयोजन, यातायात व्यवस्था और जनजागरण कार्यक्रमों में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
स्वच्छता अभियान, नशामुक्ति, जल संरक्षण, पौधारोपण, वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा मतदाता जागरूकता जैसे कार्यक्रमों में स्काउट-गाइड सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। पक्षियों के लिए परिंडे लगाना, पौधों की देखभाल और प्लास्टिक मुक्त अभियान जैसी गतिविधियां बच्चों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाती हैं।
विद्यालयी शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में भूमिका
विद्यालय शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को संस्कारवान एवं जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। स्काउटिंग इस उद्देश्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षक एवं स्काउटर-गाइडर के मार्गदर्शन में विद्यार्थी अनुशासन, समय प्रबंधन, नेतृत्व, स्वावलंबन और राष्ट्रप्रेम के गुण सीखते हैं।
कोटा जिले में राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड स्थानीय संघ कोटा दक्षिण द्वारा शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा लि.-696 आर (कोटा-बारां) के सहयोग से पौधारोपण, जल संरक्षण, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, स्वच्छता तथा जनजागरण के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शिक्षा सहकारी-स्काउट गाइड वाटिका और परिंडा अभियान जैसी पहलें सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत कर रही हैं।
आइए, सेवा का संकल्प लें
स्काउट-गाइड स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि नए संकल्प लेने का अवसर है। हमें अपने जीवन में अनुशासन, सेवा, ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम को अपनाना चाहिए। लॉर्ड बेडेन पॉवेल का संदेश भी यही प्रेरणा देता है कि दुनिया को पहले से बेहतर स्थिति में छोड़कर जाना चाहिए।
स्काउटिंग वह संस्कार है, जो बच्चों को अच्छा विद्यार्थी, युवाओं को जिम्मेदार नागरिक और नागरिकों को सच्चा समाजसेवी बनाता है।
सेवा ही धर्म है, सेवा ही पहचान है और सेवा ही स्काउटिंग की सबसे बड़ी शान है
लेखक : प्रकाश जायसवाल , कब मास्टर एवं जिला प्रधान, राजस्थान राज्य भारत स्काउट एवं गाइड, कोटा






