कोटा/अपना घर आश्रम ने एक बार फिर बिछड़े परिवार को मिलाने का पुण्य कार्य किया। ग्वालियर से इलाज के लिए ले जाई गई 75 वर्षीय माँ आनंदी देवी के अचानक लापता होने से पुत्र प्रताप जाटव और उनका परिवार पिछले डेढ़ माह से दर-दर भटक रहा था।
जे.के. लोन अस्पताल के बाहर मिली थीं लावारिस
गत माह समाजसेवी *प्रतीक्षा पारीक* ने जे.के. लोन हॉस्पिटल, कोटा के बाहर एक वृद्धा को लावारिस अवस्था में भटकते देखा। सूचना पर अपना घर आश्रम की टीम तुरंत मौके पर पहुँची और उन्हें आश्रय दिया। पूछने पर वृद्धा ने अपना नाम आनंदी देवी बताया, लेकिन मानसिक अस्वस्थता के कारण वह अपने पते के बारे में कुछ नहीं बता पा रही थी।
काउंसलिंग से खुला राज, निकला ग्वालियर कनेक्शन
आश्रम में नियमित देखभाल और काउंसलिंग के बाद आनंदी देवी ने बताया कि वह मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के बरैनी गाँव की रहने वाली हैं, जो डबरा थाना अंतर्गत आता है।
आश्रम टीम ने तुरंत डबरा थाने में सूचना भिजवाई। थाने के माध्यम से जब बेटे प्रताप जाटव से बात हुई तो उसने फोटो देखकर तुरंत अपनी माँ को पहचान लिया।
सुनते ही रवाना हुआ बेटा
माँ के मिलने की खबर सुनते ही प्रताप अपने भतीजे रामदास को लेकर तुरंत कोटा के लिए रवाना हो गया। अपना घर आश्रम पहुँचते ही जैसे ही प्रताप ने माँ को देखा, वह दौड़कर माँ से लिपट गया और फूट-फूट कर रोने लगा।
बेटे ने बताया दर्द
प्रताप ने बताया, “माँ को वृद्धावस्था की बीमारी के चलते इलाज के लिए ग्वालियर राजकीय चिकित्सालय ले गए थे। वहाँ भीड़ में अचानक माँ हमसे बिछड़ गई। डेढ़ महीने से पूरा परिवार सो नहीं पाया। थाने, अस्पताल, रिश्तेदार, हर जगह तलाश की। उम्मीद छोड़ दी थी। अपना घर आश्रम का फोन आया तो लगा भगवान मिल गए।”
आश्रम की तत्परता से बची जान
अपना घर टीम ने बताया कि जब आनंदी देवी मिली थीं तो उनकी हालत बहुत कमजोर थी। समय पर इलाज और देखभाल न मिलती तो अनहोनी हो सकती थी।
मानवता की जीत
एक बार फिर अपना घर आश्रम ने साबित किया कि सेवा और संवेदना से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। डबरा पुलिस और प्रतीक्षा पारीक के सहयोग से यह मिलन संभव हो पाया।




















