Saturday, April 18, 2026
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साहित्य रचना-जायका*बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”

जायका

—–

रंग कई जीवन के,

स्वाद लेकर जीयो ।

कड़वे-मीठे घूँट का,

जायका लेकर पीयो ।।

प्रारब्ध भी जुड़ा हुआ,

इम्तिहान उसे कहो ।

गंगा-यमुना-सरस्वती की,

धाराऐं बन कर बहो ।।

संघर्षों पर कदम रखो,

विपदाओं का मज़ा चखो ।

हिम्मत कभी न हारिये,

ग़म का भी ज़ाम भखो ।।

श्रृंगार न जाने दो हाथ से,

लेते रहो जायका ।

अर्धांगनी भी आखिर जाना,

भूल जायेगी मायका ।।

दूध-सोमरस-काॅफी और,

संग मज़ा है चाय का ।

लेते रहें समय समय पर,

इनका मधुर जायका ।।

#स्वरचित/मौलिक/सर्वाधिकार सुरक्षित

#रचनाकार: बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”

कोटा (राजस्थान)

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