Tuesday, September 8, 2026
Screenshot_2026-02-16-14-04-33-20_6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

  गीत – मैया समझाइ ले कान्हा कूं- रघुराज सिंह कर्मयोगी

 

   गीत – मैया समझाइ ले कान्हा कूं

रघुराज सिंह कर्मयोगी

 

मैया समझाइ ले कान्हा कूं, मग में फोड़े मटकी।

डगर में फोड़े मटकी, राह में तोड़े मटकी।

मैया समझाइ ले कान्हा कूं, मग में फोड़े मटकी।

 

जब हम मांखन बेचन जावें, बीच राह में पावै।

ग्वाल बाल सब संग में लेकें, गोपिन खूब छकावै।

पेट पलै कैसे नंदरानी,जब सांस अधर में अटकी।

मैया समझाइ ले लल्ला कूं, हमारी तोड़े मटकी।

 

दूध,दही और माखन,मिश्री ग्वालिन बेचें मथरा।

पहलो हक गोकुल बारेन कौ,कंस खाइगौ पथरा।

जननी देउ बताइ इन्हें हम,चौं तोड़ी मटकी।

मैया का समझाइगी मोकूं,मग में फोड़ी मटकी।

 

अरी गोपियों लाजन आवै, सांचो मेरौ लल्ला।

अपने बालक दूध कूं तरसें, मोटे कंस के ठुल्ला।

नीकी बात मेरौ कान्हा बोले,तभी तो तोड़ै मटकी।

गोपी ना समझाऊं कान्हा,मग में तोड़ी मटकी।

 

मोकों नांहि शौक चर्रावै, इनकूं तंग करत में।

सोच बदलनी होइगी इन्ने,बृजवासिन के हित में।

नौंन तेल के चक्कर में तुम, मटकी में अटकी।

मैया का समझाएगी मोकों ,काहे फोड़ी मटकी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles