कोटा शहर में नंदग्राम कहे जाने वाले पाटनपोल स्थित फुल बिहारी जी का मंदिर स्थापत्य एवं शिल्प कला का केंद्र है, इस मंदिर का निर्माण कोटा राज्य के तत्कालीन शासक महाराव रामसिंह द्वितीय की पत्नी फूलकंवर बाई सन 1861 में करवाया था, मंदिर का प्रवेश द्वार कलात्मक व पूर्व मुखी है, मंदिर में मूर्ति की स्थापना महारानी व महाराव द्वारा एक धार्मिक आयोजन की गई थी, महाराव महारानी दोनों ही पुष्टिमार्ग संप्रदाय के अनुयायी थे, तब से लेकर आज तक फूल बिहारी जी महाराज की पूजा अर्चना इसी समुदाय द्वारा की जाती है
पाटन पोल स्थित बड़े महाप्रभु जी का मंदिर है, पूर्वज महाप्रभु जी जतीपुरा मथुरा से झालावाड़ स्थित गागरोन किले से ले गए, वहां से संवत 1725 में तत्कालीन महाराज महाप्रभु जी को कोटा लेकर आए, महाप्रभुजी मंदिर में स्थापित मूर्ति पहले मथुरा के पास स्थापित थी, वहां से झालावाड़ के पास गागरोन किले कई साल रहने के बाद 300 साल पहले कोटा दरबार के आग्रह पर मूर्ति को कोटा लाया गया, दरबार की ओर से यह मंदिर धर्मगुरु ब्रजाभरण दीक्षित को दिया गया, मंदिर में मूर्ति की स्थापना की गई, तब से लेकर आज तक दीक्षित महाराज की पीढ़िया देखरेख संभालती आ रही है, कोटा दरबार का महाप्रभु जी मंदिर से प्रति बड़ा स्नेह रहा, महाराव भीम सिंह तक सभी राजा जन्माष्टमी पर यहां पालने के दर्शन करने आते थे






