******* ग़ज़ल********
शकूर अनवर
ऐसा होना ठीक नहीं है।
इतना रोना ठीक नहीं है।।
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इसको तुम क़ाबू में रक्खो।
दिल का खोना ठीक नहीं है।।
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जीवन को आसान बनाओ।
पर्बत ढोना ठीक नहीं है।।
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प्यार में रक्खो सिर्फ़ भरोसा।
जादू- टोना ठीक नहीं है।।
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फ़स्ल उगेगी मायूसी* की।
ऑंसू बोना ठीक नहीं है।।
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ठीक है हमको रोज़ी-रोटी*।
चाॅंदी सोना ठीक नहीं है।।
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टूट चुका है अब दिल मेरा।
अब ये खिलौना ठीक नहीं है।।
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रात कटेगी तारे गिनकर।
दिन को सोना ठीक नहीं है।।
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ख़्वाब ख़ुशी के देखो “अनवर”।
रोना-धोना ठीक नहीं है।।
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शब्दार्थ:-
मायूसी* यानी निराशा
रोज़ी-रोटी*काम धंधा रोज़गार
शकूर अनवर
9460851271
******* ग़ज़ल*******
शकूर अनवर
किसी भी मोड़ से मुझको न अब सदा* देना।
तमाम नक़्श मुहब्बत के तुम मिटा देना।।
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चलो तबाही पे मेरी उन्हें मलाल* तो है।
तसल्ली टूटे हुए दिल को और क्या देना।।
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हमेशा कुफ्र* ने ईमान* को जिला* बख़्शी।
जहाँ भी बुत* मिले कोई तो सर झुका देना।।
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वो जिससे टूट गिरेंगे ये नफ़रतों के पहाड़।
तू वो चिराग़ मुहब्बत का मत बुझा देना।।
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किसी ने आज तलक कुछ नहीं दिया “अनवर”।
में चाहता हूंँ मुझे तुम भी बददुआ* देना।।
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शब्दार्थ:-
सदा*आवाज़
नक़्श*चिन्ह निशान
मलाल*दुख
कुफ्र *अधर्मिता
ईमान*आस्था
जिला*चमक
बुत*मूर्ति मेहबूब
बददुआ*कोसना देना
शकूर अनवर
9460851271






