तूफ़ान
उचित निर्णय की प्रबलता को कहें तूफ़ान,
जज़्बा हो रग़ में निरंतर, लहू में ऊफ़ान ।
योग्यता के दम चमकादे जो वो जहान,
मूल्य पल-पल का जो समझे, है वही महान
प्रखर बुद्धि की विलक्षणता ही बने सम्मान ।
कर्म-गति के प्रचण्ड तपन को कहें तूफ़ान ।।
लक्ष्य-प्राप्ति हेतु जो अर्पण करें जी-जान,
उद्यम तथा मति से जो हो व्यक्तित्व की पहचान ।
द्रुत-गति से कार्य करनें की जो लेता ठान,
उचित निर्णय की प्रबलता को कहें तूफ़ान ।।
वेग से बढ़ता निरंतर जो सुबह से शाम ।
कार्य-क्षमता का धनी रुकने का न लें नाम ।।
हँसता हमेशा हर घड़ी जिसकी अनूठी शान,
कर्मवीर की ही क्षमता को कहें तूफ़ान ।
ऐसे दहकते अंगारों का, नित करें आव्हान,
उचित निर्णय की प्रबलता को कहें तूफ़ान ।।
(स्वरचित/मौलिक/अप्रकाशित)
(रचनाकार: बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”)
कोटा (राजस्थान)
तूफ़ान -बृजेंद्र सिंह झाला ‘पुखराज’





