# योग भगाए रोग
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योग,
भगाए रोग ।
जुड़े सब लोग,
बने संजोग ।।
भोग रहे,
भोग ।
लगा रहे,
ढोक ।।
जिससे,
हरिक
स्वस्थ-निरोग
यत्र योगेश्वर कृष्ण ने
मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने
योगी-ॠषि-मुनियों ने
योग-गुरु रामदेव ने
विस्तार दिया है जिसको ।
हर प्राणी इस भरत-भूमि का,
पूज रहा है उसको ।।
कपालभाति-अनुलोम-विलोम ।
भस्त्रिका से काया मोम ।।
भ्रामरी-आसन-प्राणायाम ।
ऐसे कितने ही व्यायाम ।।
उज्जाही-सूर्य-नमस्कार ।
ऊर्ज़ा का नहीं पारावार ।।
खिल जाए सारा तन-मन ।
व्याधी का हो जाए शमन ।।
इससे नहीं और कोई भोग ।
योग भगाए सबका रोग ।।
# स्वरचित/मौलिक/सर्वाधिकार सुरक्षित
# बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”
कोटा (राजस्थान)
काव्य- योग भगाए रोग- बृजेंद्र सिंह झाला ‘पुखराज’





