Friday, October 2, 2026
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फूट डालो राज करो की अंग्रेज कूटनीति आज भी सक्रिय हैँ – सिसोदिया 

कोटा। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविंद सिसोदिया ने विश्व में चल रहे वर्तमान अराजक और दबावपूर्ण घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत के विरुद्ध एक सुनियोजित “ आराजकता सपोर्ट षड्यंत्र” के तहत सामाजिक समरसता को कमजोर करने और देश में अराजकता फैलाने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस साजिश का मूल उद्देश्य भिन्न-भिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और टकराव पैदा कर देश की एकता व अखंडता को चोट पहुँचाना है और भारतीय सत्ता पर जबरिया कब्जा प्राप्त करना है।

सिसोदिया नें कहा भारत प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में तेजी प्रगति कर रहा है, भ्रष्टाचार और ग़रीबी से मुक्त हो रहा है। रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बन रहा है। जिसे विदेशी बाजारवाद और विदेशी सांम्प्रदायिक ताकतें पचा नहीं पा रहीं हैँ।

सिसोदिया ने कहा कि इतिहास गवाह है कि अंग्रेजों ने “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाकर भारत को लंबे समय तक गुलाम बनाए रखा। आज उसी मानसिकता के साथ नए रूपों में वही षड्यंत्र दोहराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू और हिंदुस्तान को सर्वाधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है, ताकि कोई भी बाहरी या आंतरिक शक्ति देश को कमजोर न कर सके।

सिसोदिया ने कहा कि विदेशी षड्यंत्रों और सहयोगों के द्वारा भारत की सत्ता और राजनीति पर अंग्रेज, पश्चात्य संस्कृति और विदेशी षड्यंन्त्रों के हितचिंतक थोपने के कुप्रयास हो रहे हैं। इनसे जुड़े तत्व भारतीय मूल्यों का निरंतर अपमान कर रहे हैं और उन पर हमले कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इनसे जुड़े तत्व भारतीय संवैधानिक तंत्र और शक्तियों पर भी प्रहार कर रहे हैं, जिसे समझना देशवासियों के लिए बहुत जरूरी है।

सिसोदिया ने कहा कि विदेशी धरती से कई-कई दशकों से भारत-विरोधी एजेंडा संचालित हो रहे हैं, जिन्हें अनुभव से समझा जा सकता है। उन्हें देश के अंदर सपोर्ट करने वाले भी स्पष्ट नजर आ रहे हैं। इन्हें लोकतांत्रिक तरीके से विफल करना भारतीय जनमत की जिम्मेदारी और जवाबदेही है।

सिसोदिया नें समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे आपसी भाईचारे, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता दें तथा किसी भी भ्रामक प्रचार या उकसावे में न आएँ। उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और संगठित होकर ही ऐसे षड्यंत्रों को विफल किया जा सकता है।

 

 

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