Friday, August 28, 2026
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भारतीय संस्कृति परम्परा के मौलिक सूत्रों के अनुसार जीवन जीने में ही सफलता प्राप्त होती है : आचार्य स्वामी गोविन्द देव गिरी जी महाराज 

बारां।साबू परिवार, बारां की ओर से स्व. मुरलीधर साबू चैरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत 5 जन से 11 जनवरी तक आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के षष्ठम दिवसकथा व्यास पीठाधीश्वर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय संत श्री गोविंद देव गिरी जी महाराज ने गोवर्धन लीला का अत्यंत भावपूर्ण, तात्त्विक एवं आध्यात्मिक विवेचन किया।

महाराज श्री ने प्रवचन में कहा कि गोवर्धन लीला केवल एक चमत्कारी घटना नहीं, बल्कि भक्ति, प्रकृति संरक्षण और अहंकार त्याग का शाश्वत संदेश है। इंद्र के अहंकार को भंग कर भगवान श्रीकृष्ण ने यह स्पष्ट किया कि सृष्टि का संचालन ईश्वर की करुणा से होता है, न कि किसी के पद या शक्ति के दंभ से। गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर धारण कर श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को यह अनुभूति कराई कि जो शरणागत है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं ।

 

राष्ट्रीय संत गोविंद देव गिरी जी महाराज ने कहा कि गोवर्धन पूजा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म, स्वावलंबन और लोककल्याण की भावना को प्रतिष्ठित किया। प्रकृति ही मानव जीवन का आधार है, अतः उसका सम्मान और संरक्षण ही सच्ची भक्ति है। महाराज श्री ने वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और अहंकार से मुक्त जीवन को गोवर्धन लीला का समकालीन संदेश बताया।

प्रवचन के दौरान कथा पंडाल “गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्रोतागण भाव-विभोर होकर भक्ति रस में डूब गए। साबू परिवार की ओर से विष्णु साबू ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।

कथा व्यास पीठाधीश्वर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय संत श्री गोविन्द देव गिरि जी महाराज द्वारा श्रीमद् भागवत के मूल, शास्त्रीय एवं सनातन स्वरूप से जुड़े गूढ़ प्रवचनों का भावपूर्ण विवेचन किया जा रहा है।

महाराज श्री ने अपने प्रवचनों में स्पष्ट किया कि श्रीमद् भागवत केवल कथा-श्रवण का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिव्य संहिता है। भागवत का मूल स्वरूप भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के समन्वय से मनुष्य को आत्मबोध की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भागवत के शाब्दिक या मनोरंजनात्मक प्रस्तुतीकरण से हटकर, उसके तात्त्विक अर्थ, शास्त्रीय मर्यादा और मूल भाव को समझना अत्यंत आवश्यक है।

श्री गोविन्द देव गिरि जी महाराज ने भागवत के विविध प्रसंगों के माध्यम से बताया कि इसमें वर्णित अवतार कथाएं किसी एक काल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मानव स्वभाव, सामाजिक संतुलन और आध्यात्मिक उत्थान का सार्वकालिक मार्गदर्शन करती हैं। महाराज श्री ने चेताया कि यदि भागवत को उसके मूल स्वरूप में नहीं अपनाया गया तो उसका वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

प्रवचन के दौरान महाराज श्री ने सनातन धर्म की वैचारिक दृढ़ता, भारतीय संस्कृति की आत्मा तथा धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे भ्रमों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत संकीर्णता नहीं, बल्कि समग्रता और करुणा का संदेश देती है।

इस अवसर पर आयोजक विष्णु साबू ने बताया कि बारां में आयोजित यह श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समाज को शुद्ध आध्यात्मिक दिशा देने तथा युवा पीढ़ी को सनातन मूल्यों से जोड़ने का एक प्रयास है। कथा पंडाल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर श्रीमद् भागवत के अमृत वचनों का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

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