Saturday, October 3, 2026
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कक्षा 10 में फेल हुए, फिर भी बने कंपनी के CEO; वी.के. जेटली ने विद्यार्थियों को बताए सफलता के चार ‘डी’

डिग्री से आगे सफलता की राह दिखा गए वी.के. जेटली

करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय में ‘दीक्षारंभ-2026’ नवागंतुक अभिमुखीकरण कार्यक्रम, सैकड़ों विद्यार्थियों ने लिया सफलता का मंत्र

भारत सिंह चौहान✍️

कोटा। करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के विश्वविद्यालयी जीवन की शुरुआत को यादगार बनाने के उद्देश्य से ‘दीक्षारंभ-2026’ नवागंतुक अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करेजियस कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं संस्थापक निदेशक तथा डीसीएम श्रीराम इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी.के. जेटली ने मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि जीवन में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। सफलता के लिए लक्ष्य, दिशा, समर्पण और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

असफलता से घबराएं नहीं, खुद की ‘वैल्यू’ पर करें काम

वी.के. जेटली ने अपने करीब पांच दशक के पेशेवर जीवन के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं, लेकिन असफलता से घबराकर रुक जाना सबसे बड़ी भूल है। उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कक्षा 10वीं में असफल होने के बावजूद उन्होंने निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास के बल पर डीसीएम कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तक का सफर तय किया।

उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता के चार ‘डी’—डिजायर (Desire), डायरेक्शन (Direction), डेडीकेशन (Dedication) और डिसिप्लिन (Discipline)—को जीवन में उतारने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन चारों के बिना बड़ी डिग्री हासिल करने के बावजूद व्यक्ति अपनी वास्तविक क्षमता का उपयोग नहीं कर पाएगा।

खरगोश-कछुए की कहानी का दिया नया संदर्भ

जेटली ने विद्यार्थियों को टीमवर्क का महत्व समझाते हुए खरगोश और कछुए की पारंपरिक कहानी को नए संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यदि दोनों अपनी-अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए एक-दूसरे की मदद करें तो मंजिल तक पहुंचना अधिक आसान हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से सहयोग, विश्वास और टीम भावना को अपनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, आज के प्रतिस्पर्धी दौर में व्यक्तिगत प्रतिभा के साथ टीम के रूप में काम करने की क्षमता भी सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी है।

‘प्रवेश नई कहानी लिखने का अवसर’

विश्वविद्यालय के चांसलर प्रमोद माहेश्वरी ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश केवल डिग्री हासिल करने की शुरुआत नहीं, बल्कि जीवन की नई कहानी लिखने का अवसर है। विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्टता रखनी चाहिए। मंजिल स्पष्ट होगी तो उसे हासिल करने की दिशा में प्रयास भी प्रभावी होंगे।

वाइस चांसलर प्रो. डॉ. मयंक सक्सेना ने विद्यार्थियों को ईमानदारी, उत्सुकता, अनुशासन और आत्मसम्मान जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और दृष्टिकोण का विकास करना भी है।

कैंपस, स्मार्ट क्लासरूम और लैब्स से कराया परिचित

कार्यक्रम के दौरान नवागंतुक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के कैंपस, स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशालाओं और स्टार्टअप सुविधाओं की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक अवसरों से परिचित कराया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का रंग भर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। इसके बाद सरस्वती वंदना और गणेश स्तुति प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का मंच संचालन भाविका गुप्ता ने किया।

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