केडीए आयुक्त ने ली समीक्षा बैठक: क्षतिग्रस्त सड़कों एवं गड्ढों को शीघ्र दुरुस्त करने के दिए निर्देश
कोटा/शहर के विकास कार्यों को रफ्तार देने और आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए कोटा विकास प्राधिकरण निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में गुरुवार को केडीए आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में प्राधिकरण में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य सभी स्वीकृत प्रोजेक्ट्स को समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के साथ-साथ, लम्बित प्रकरणों का निस्तारण और व्यवस्थाओं को अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।
निर्माण कार्यों की समुचित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आयुक्त महोदय ने ‘केडीए दृष्टि’ (KDA Drishti) एप का दायरा बढ़ाते हुए निर्देश दिए हैं कि वर्तमान में इस एप पर केवल 5 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स ही लाइव किए जा रहे थे, लेकिन अब निगरानी को और अधिक बढ़ाने के लिए 2 करोड़ रुपये से अधिक के सभी प्रोजेक्ट्स को इस पर अनिवार्य रूप से लाइव किया जाएगा। इन कार्यों की काम शुरू होने से पहले, काम के दौरान और काम खत्म होने के बाद की जियो-टैग फोटो के साथ-साथ सभी क्वालिटी टेस्ट रिपोर्ट भी पोर्टल पर डालना अनिवार्य होगा। कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए गारंटी पीरियड (डीएलपी) के तहत आने वाले कार्यों पर केडीए की पैनी नजर रहेगी। सभी संबंधित अभियंताओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे डीएलपी अवधि वाले कार्यों और सड़कों का नियमित रूप से भौतिक निरीक्षण करें। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार का दोष मिलने पर संवेदक से तुरंत मरम्मत करवाई जाए और लापरवाही करने वाले संवेदकों को नोटिस देकर सीधे ब्लैकलिस्ट करने की कार्यवाही की जाए। साथ ही, बारिश से खराब हुई सड़कों व गड्ढों को बिना किसी देरी के भरने तथा कार्यों में डुप्लीकेसी रोकने के लिए नगर निगम सहित अन्य विभागों से कार्य शुरू होने से पूर्व तालमेल सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
आमजन की सुविधाओं और शिकायतों के समाधान को प्राथमिकता देते हुए आयुक्त ने राजस्थान सम्पर्क, सीएमओ और पीएमओ से प्राप्त परिवादों की सघन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 20 दिवस से अधिक समय से लम्बित प्रकरणों का हर हाल में अविलंब निस्तारण किया जाए। इसके साथ ही, शहरवासियों को अब सड़क, स्ट्रीट लाइट और पार्क से जुड़ी अपनी शिकायतों के लिए प्राधिकरण के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके लिए केडीए ने ‘ई-निवारण’ (e-Nivaran) एप विकसित किया है, जिसे आगामी 15 सितंबर 2026 से आम-जन के लिए लाइव कर दिया जाएगा।
आम जनता को भूखंड की भवन निर्माण स्वीकृति में होने वाली परेशानी का निवारण करने के लिए बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (BPAS) में एक एसओपी (SOP) लागू की जा रही है। इस एसओपी में आवेदन पर कार्यवाही के लिए डीलिंग असिस्टेंट, कनिष्ठ अभियंता (JEN) और प्लानिंग सेक्शन के स्तर पर निश्चित दिन तय किए जाएंगे, ताकि बिना किसी देरी के भवन निर्माण स्वीकृति तय समय पर जारी हो सके।
केडीए की ऐसी योजनाएं जिनमें फ्लैट या दुकान के आवंटन पर बैंक लोन के बजाय सीधे प्राधिकरण स्तर पर ही किश्तों (EMI) की सुविधा दी गई है, लेकिन आवंटी समय पर किश्त नहीं चुका रहे हैं, ऐसे डिफाल्टरों पर शिकंजा कसने के लिए भी बड़ी तैयारी की गई है। प्राधिकरण का आईटी सेल ‘केडीए डिफॉल्ट एंड रिकवरी ट्रैकर’ तैयार कर रहा है, जिससे ऐसे डिफाल्टरों की सूचना संकलित कर रिकवरी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा प्राधिकरण के रिकॉर्ड को पूरी तरह से पेपरलेस बनाने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक सभी फिजिकल फाइलों का डिजिटाइजेशन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान की समीक्षा करते हुए आयुक्त महोदय ने सभी अधिशाषी अभियंताओं को सख्त निर्देश दिए कि वे आवंटित पौधारोपण के लक्ष्यों को हर हाल में 31 अगस्त 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। इसी तय सीमा (31 अगस्त) तक लगाए गए सभी नए पौधों की जियो-टैगिंग और पुराने पौधों की री-जियो-टैगिंग का कार्य भी अनिवार्य रूप से पूरा किया जाना है।
बैठक के दौरान प्राधिकरण सचिव श्री मुकेश कुमार चौधरी ने भी सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जनहित के विकास कार्य अपनी तय समय-सीमा में पूरे हों, और कोई भी फाइल अनावश्यक रूप से कार्यालय में न रुके।
समीक्षा बैठक में प्रशिक्षु आई०ए०एस० उत्कर्ष यादव, उपायुक्त शिक्षा पवन, निदेशक (अभियांत्रिकी) रविन्द्र प्रकाश माथुर, निदेशक (नियोजन) भूपेश मालव, निदेशक (वित्त) रोहित दीक्षित, निदेशक (विधि) तरुण दाधीच, सलाहकार (नियोजन) संदीप दंडवते, सलाहकार (राजस्व) परमानंद गोयल और सलाहकार (अभियांत्रिकी) श्री वी.के. जैन के साथ प्राधिकरण के समस्त अधीक्षण अभियंता, अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनिष्ठ अभियंतागण मौजूद रहे।







