कुछ दोहे,,,,,,,,
शकूर अनवर
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त्राहि-त्राहि सी मच गई,सुन लो अब भगवान।
सोये सारे देवता, जाग उठा शैतान।।
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चेहरे फीके पड़ गये, कहाँ गया वो नूर।
सूनी-सूनी ऑंख में, सपने चकनाचूर।।
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अब तो हर इन्सान ही, इन्सानों को खाय।
क्या जंगल के जानवर,बस्ती में घुस आय।।
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शकूर अनवर
नूर*तेज,चमक
9460851271






