Tuesday, April 28, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

मेघनाथ मारै कस्यां–दुर्गाशंकर बैरागी ‘वैष्णव’

मेघनाथ मारै कस्यां

———————————————————

मेघनाथ जोधो बडो,राखै तीर कमान।

मायावी छो जोर को,बीर बली बलवान।।

 

इंदर ऊंनै जीत ल्यो,जबरो करद्यो काम।

जद सूं इंदरजीत सा,पड़ग्यो ऊंको नाम।।

 

नागराज की लाडली,रूप सील गुणवान।

सुलोचना पाताळ का,नागलोक को मान।।

 

मनड़ा जद वांका मल्या,उडगी वांकी नींद।

सुलोचना परणी बणी,मेघनाथ जी बींद।।

 

नागराज कळप्या घणा,वांकै आग्यो रोस।

मेघनाथ नै परण कै,बेटी करद्यो दोस।।

 

नेण मलै जद नेण सूं,हो जावै छै प्रीत।

पूछै कुण सा बाप सूं,याई जग की रीत।।

 

रावण नै सीता हरी,लेग्यो समदर पार।

करी चढ़ाई राम नै,बानर सेना लार।।

 

बीर घणा ई मारद्या,अवधपती रघुनाथ।

मेघनाथ मारै कस्यां,सतवंती को साथ।।

 

बरदाना को सायरो,करै कवच का काम।

सेसनाग ई मारसी,या बी जांणै राम।।

 

खाडै कोनै नींद ज्यो,खावै कोनै गास।

सेज सारबा नार सूं,जावै कोनै पास।।

 

मेघनाथ मारै जदी,जण दै माई लाल।

सरतां वू पूरी करै,रे वै चोदा साल।।

 

लखन छोड कै नार नै,चलग्या छा बनवास।

जती तजी छी नींद नै,खायो कोनै गास।।

 

मेघनाथ का काळ नै,मार्यो मेघनाथ।

अवधपती रघुनाथ नै,भरी लखन की बाथ।।

रचनाकार-दुर्गाशंकर बैरागी ‘वैष्णव’

शिवपुरा,कोटा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles