Sunday, April 19, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

ग़ज़ल-शकूर अनवर

ग़ज़ल

शकूर अनवर

आस्तीनों में छुपाया हुआ ख़ंजर क्या है।

ख़ून-आलूदा वही शहर का मंज़र क्या है।।

*

जब मेरे घर में कोई काॅंच की खिड़की भी नहीं।

फिर तेरे हाथ में ऐ दोस्त ये पत्थर क्या है।।

*

तू सितमगर* है तो तलवार उठा काट मुझे।

मेरा क्या है मेरी औक़ात* मेरा सर क्या है।।

*

इनको ऐसे भी तो समझो कि ये अच्छे दिन हैं।

फिर मेरी जान कोई ख़ौफ़ कोई डर क्या है।।

*

ज़िंदगी भूख से ग़ुरबत* से मुक़ाबिल* ही रही।

हमने वो जंग लड़ी है कि सिकन्दर क्या है।।

*

हो रहा है वही सब कुछ जो यहाँ होना था।

फिर भी अंदेशा* कोई ज़ह्न के अंदर क्या है।।

*

दिल तो दिल है कई जंगल कई सहरा* इसमें।

दिल की वुसअत* के बराबर ये समन्दर क्या है।।

*

सूरमा* कोई भी हो कौन बचा है इससे।

मौत के सामने अदना” सा ये “अनवर” क्या है।।

*

शकूर अनवर

ख़ून-आलूदा*रक्त रंजित

सितमगर*अत्याचार करने वाला

औक़ात*हैसियत

ग़ुरबत*दरिद्रता गरीबी

मुक़ाबिल*युद्धरत

अंदेशा*ख़याल, वहम

सहरा*रेगिस्तान

वुसअत*विस्तार, फैलाव

सूरमा*बहादुर, निडर

अदना*तुच्छ

9460851271

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles