# जय भोले भंडारी
————
पल में हो जाते प्रसन्न तुम,
सब तुम पर बलिहारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।।
घुँघरू बाँध पग जटा बिखेरें,
नाचे डमरूधारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।।
पल में हो जाते प्रसन्न तुम ……
मृत्युंजय हे महाकाल !
देवादिदेव गंगाधर ।
सोमनाथ हे ॐकार !
हे महादेव प्रभु हर हर ।।
मात उमा के साथ किऐं,
नंदी पर बैठ सवारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।।
पल में हो जाते प्रसन्न तुम ….
बाघाम्बर अरु त्रिशूलधारी,
रूद्रदेव तुम मन्मथहारी,
सुर-नर-मुनि सबके हितकारी,
भक्तों के हो भवभयहारी ।।
कामदेव का कर विनाश,
कहलाते प्रलयंकारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।।
पल में हो जाते प्रसन्न तुम ….
गणपति के हो पिता तुम्हीं,
हो पार्वती के प्यारे ।
संताप सभी का हरते,
तुम हो अखिल विश्व में न्यारे ।।
कैलाशपति तेरी महिमा को,
गाऐं सृष्टि सारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।।
पल में हो जाते प्रसन्न तुम …..
धारें सर्पाहार गले में,
नित नित भाँग चढाऐं ।
गोरा माता घिस घिस करके,
आपकी ओर बढ़ाऐं ।।
रह रह कर वह लगा रहे हैं,
हरदम जिसकी तारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।।
पल में हो जाते प्रसन्न तुम ….
देव-निशाचर ने मिल करके,
सागर-मंथन किया जहाँ ।
जिससे निकले हलाहल को,
विश्वनाथ ने पिया वहाँ ।।
जिसके कारण पूजे जाते,
नीलकण्ठ वे त्रिपुरारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।।
पल में हो जाते प्रसन्न तुम ….
आशुतोष हो दयानिधे,
तुम दुनिया के रखवारे ।
सँहार करें दानव-दल का,
जन-जन के काज सँवारे ।।
“पुखराज” तिहारी भस्म रमाऐं,
जाये तुझ पर वारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।।
पल में हो जाते प्रसन्न तुम,
सब तुम पर बलिहारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।
घुँघरु बाँध पग जटा बिखेरें,
नाचे डमरूधारी ।
जय जय भोला भंडारी,
जय जय भोला भंडारी ।।
पल में हो जाते……
# स्वरचित/मौलिक/सर्वाधिकार सुरक्षित
# बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”,
कोटा (राजस्थान)
जय भोले भंडारी- बृजेंद्र सिंह झाला ‘पुखराज’






