उज्जैन। सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन में विकास और सड़क चौड़ीकरण के काम तेजी से चल रहे हैं। इसी दौरान सती गेट से छत्री चौक मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रशासन की ओर से कई प्रयास किए जाने के बावजूद प्रतिमा को अपनी जगह से हटाया नहीं जा सका।
मंदिर के आसपास सड़क चौड़ीकरण के लिए निर्माण ढांचे को हटाए जाने के बाद प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी की गई थी। इसके लिए भारी मशीनरी और हाइड्रोलिक क्रेन की मदद ली गई। बताया जा रहा है कि कई बार प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपेक्षित तरीके से नहीं हिली।
मशीनरी से प्रयास के बाद प्रशासन ने रोकी कार्रवाई
लगातार कोशिशों के बावजूद सफलता नहीं मिलने के बाद अब प्रतिमा को जबरन हटाने के बजाय तकनीकी और विशेषज्ञ सलाह लेने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि अत्यधिक दबाव डालने से प्राचीन प्रतिमा को नुकसान न पहुंचे।
विशेषज्ञों की टीम प्रतिमा के आधार, जमीन के नीचे उसकी स्थिति और आसपास की संरचना का अध्ययन करेगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय किए जाने की संभावना है।
जमीन के नीचे क्या है? जांच से मिलेगा जवाब
प्रतिमा के नीचे की स्थिति जानने के लिए भू-स्कैनिंग अथवा ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) जैसी तकनीक का सहारा लिए जाने की बात सामने आई है।
इस जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि—
– प्रतिमा का आधार जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है।
– नीचे कोई पुरानी संरचना या पत्थर मौजूद है या नहीं।
– प्रतिमा किस प्रकार के आधार से जुड़ी हुई है।
– उसे स्थानांतरित करने में किस तरह का तकनीकी जोखिम हो सकता है।
इस जानकारी के आधार पर विशेषज्ञ यह सुझाव दे सकेंगे कि प्रतिमा को हटाना सुरक्षित है या नहीं।
प्राचीनता को लेकर भी सामने आए अलग-अलग दावे
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर इसके इतिहास और प्राचीनता के संबंध में अलग-अलग जानकारियां सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में मंदिर के इतिहास को करीब 170 वर्ष पुराना बताया गया है, जबकि प्रतिमा के संभावित पुराने काल से जुड़े दावे भी किए गए हैं।
हालांकि प्रतिमा की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक काल को लेकर अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक जांच के बाद ही निकाला जाना उचित होगा। इसलिए फिलहाल प्रतिमा की उम्र को लेकर किसी एक दावे को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं है।
श्रद्धालुओं में बढ़ा कौतूहल
प्रतिमा के स्थानांतरित नहीं होने की खबर सामने आने के बाद क्षेत्र में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। कई श्रद्धालु इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं और उनका मानना है कि बजरंगबली का इस स्थान से विशेष संबंध है।
मंदिर के आसपास बंदरों की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। कुछ श्रद्धालु इसे धार्मिक संकेत मान रहे हैं। हालांकि यह श्रद्धालुओं की आस्था और मान्यता है, इसकी वैज्ञानिक पुष्टि का कोई आधार सामने नहीं आया है।
अब विशेषज्ञों के फैसले पर टिकी नजरें
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के मद्देनजर उज्जैन में विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाली संरचनाओं की सुरक्षा भी अहम है।
ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि विकास कार्य भी प्रभावित न हों और प्राचीन प्रतिमा को किसी प्रकार का नुकसान भी न पहुंचे। अब विशेषज्ञों की तकनीकी जांच और रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रतिमा को स्थानांतरित किया जा सकता है या विकास योजना में कोई वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ेगा।
फिलहाल उज्जैन में खड़े हनुमान की प्रतिमा का मामला विकास, विरासत और आस्था—तीनों के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।





