कोटा। छह वर्ष पुराने चर्चित दुष्कर्म मामले में कोटा की विशेष न्यायालय (पॉक्सो क्रम-3) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दिल्ली के एक प्रॉपर्टी डीलर को दोषी ठहराया है। न्यायाधीश घनश्याम शर्मा ने आरोपी मनोज कुमार बड़सीवाल को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹50,000 के अर्थदंड से दंडित किया।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि आरोपी की शुरुआत से ही पीड़िता से विवाह करने की कोई वास्तविक मंशा नहीं थी। उसने झूठे वादों और विवाह के आश्वासन के जरिए पीड़िता की सहमति प्राप्त की, जो कानून की दृष्टि में दोषपूर्ण सहमति (Vitiated Consent) मानी गई। इसी आधार पर आरोपी द्वारा बनाए गए शारीरिक संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में आए।
व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुई पहचान, प्रेम जाल में फंसाया
विशिष्ट लोक अभियोजक महेश नारायण शर्मा के अनुसार वर्ष 2020 में एक सरकारी शिक्षिका ने पुलिस अधीक्षक, कोटा शहर को शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि उसकी पहचान समाज के एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से दिल्ली निवासी प्रॉपर्टी डीलर मनोज कुमार बड़सीवाल से हुई थी।
धीरे-धीरे आरोपी ने प्रेम संबंध स्थापित किए और विवाह का भरोसा देकर पीड़िता के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का आरोप था कि आरोपी ने हर बार जल्द शादी करने का आश्वासन देकर उसका विश्वास जीता, लेकिन बाद में अपने वादे से मुकर गया।
स्थानांतरण और नौकरी का लालच देकर लाखों रुपये भी हड़पे
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी ने शिक्षिका का स्थानांतरण कराने और उसके दिव्यांग भाई को नौकरी दिलाने का झांसा देकर साढ़े तीन लाख रुपये ले लिए। इतना ही नहीं, आरोपी कथित रूप से पीड़िता के वेतन की राशि भी अपने पास रखता था।
मां के ऑपरेशन के दौरान भी किया शोषण
पीड़िता ने आरोप लगाया कि जून 2019 में जब उसकी मां का हार्ट ऑपरेशन चल रहा था, तब आरोपी ने शादी का भरोसा देकर न्यू मेडिकल कॉलेज के पीछे कार में उसकी इच्छा के विरुद्ध कई बार शारीरिक संबंध बनाए। गर्भधारण रोकने के लिए दवाइयां भी खिलाईं, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई और रक्तस्राव होने पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
दिल्ली ले जाकर भी नहीं हुई शादी
बाद में आरोपी पीड़िता और उसके परिवार को दिल्ली ले गया, लेकिन वहां उसके परिजनों ने विवाह से साफ इनकार कर दिया। इसके बावजूद आरोपी मार्च 2020 तक शादी का आश्वासन देकर संबंध बनाता रहा। आखिरकार 23 मार्च 2020 को उसने फोन पर शादी करने से साफ इनकार कर दिया और कथित रूप से लिए गए रुपये लौटाने से भी मना कर दिया।
2020 में दर्ज हुआ मुकदमा, 2026 में आया फैसला
पीड़िता की शिकायत पर बोरखेड़ा थाना में वर्ष 2020 में भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस जांच पूरी होने के बाद 18 जनवरी 2022 को आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
बाद में मामला सेशन न्यायालय पहुंचा और राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद 5 जून 2024 को इसे विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) क्रम-3 की अदालत में स्थानांतरित किया गया। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹50 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई।
न्यायालय का यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें विवाह का झूठा वादा कर महिला की सहमति प्राप्त कर शारीरिक संबंध बनाए जाते हैं।






