Tuesday, September 8, 2026
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पाठ्यपुस्तकों से आगे की शिक्षा : जीवन-रक्षक कौशल और समग्र विकास 

 अंकों की अंधी दौड़ से परे जीवन की वास्तविक शिक्षा

लेखक : परमानन्द गोयल , कोटा (राजस्थान)

21वीं सदी के बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में शिक्षा का अर्थ केवल उच्चतम अंक प्राप्त करना, डिग्रियों का संग्रह करना या किसी अच्छी नौकरी तक सीमित नहीं रह गया है। सच्ची और सार्थक शिक्षा वह है जो बच्चे को जीवन जीना सिखाए, विपरीत परिस्थितियों से जूझने का हौसला दे, अपनी सुरक्षा के प्रति सजग बनाए और समाज के प्रति एक संवेदनशील, जिम्मेदार व प्रबुद्ध नागरिक के रूप में गढ़े।

भारतीय विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता का लोहा पूरी दुनिया मानती है, किंतु हमारी पारंपरिक स्कूली व्यवस्था प्रायः विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षा के अंकों तक सीमित कर देती है।

प्रसिद्ध मैनेजमेंट गुरु एन. रघुरामन के अनुसार :

“देश के किसी प्रतिष्ठित संस्थान में एक सीट सुरक्षित करने के लिए एक अंक का अंश भी किसी छात्र को बाहर कर सकता है। इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि वह छात्र अक्षम है, बल्कि केवल यह है कि उन प्रीमियम संस्थानों में सीटें सीमित हैं।”

अतः किसी परीक्षा या प्रतियोगिता में पिछड़ जाना जीवन की असफलता नहीं, बल्कि खुद को नए सिरे से तराशने और सीखने का एक पड़ाव है।

1. सुरक्षा, आधुनिक साइबर-वित्तीय सतर्कता एवं कानूनी कवच

• अच्छा स्पर्श और बुरा स्पर्श : अच्छा स्पर्श सुरक्षा और स्नेह देता है, बुरा स्पर्श असहजता, भय या संकोच। असहज होने पर तुरंत ‘ना’ कहें, दूरी बनाएं और बिना डरे शिक्षक या माता-पिता को सूचित करें। चुप्पी शोषण को बढ़ावा देती है।

• साइबर, AI और वित्तीय सतर्कता : अपना नाम, विद्यालय, व्यक्तिगत फोटो व लाइव लोकेशन कभी अनजान लोगों से साझा न करें। वर्तमान खतरे – AI जनित Deepfake वीडियो/ऑडियो फ्रॉड, फर्जी लोन ऐप, UPI/QR/OTP धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के झूठे कॉल्स। विशेष : बच्चों को ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ का सिद्धांत सिखाएं – इंटरनेट पर डाली हर चीज हमेशा के लिए रहती है और भविष्य में कॉलेज-नौकरी में देखी जा सकती है। डेटा प्राइवेसी DPDP Act 2023 की बुनियादी समझ।

• बाल अधिकार एवं कानूनी सुरक्षा : POCSO Act 2012, किशोर न्याय अधिनियम 2015 और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधान बच्चों को सुरक्षा और साहस देते हैं।

• बुनियादी आत्मरक्षा : ताइक्वांडो/मार्शल आर्ट्स के बेसिक स्टांस, पंच, ब्लॉक और क्विक रिफ्लेक्स – उद्देश्य उलझना नहीं, सुरक्षित निकलना है।

• आपातकालीन हेल्पलाइन – हर डायरी व बोर्ड पर : 1098 चाइल्ड, 112 आपातकाल, 1930 साइबर, RajCop Citizen App, 14416 Tele-MANAS मानसिक स्वास्थ्य, POCSO e-Box।

2. व्यावहारिक जीवन-कौशल एवं आपदा प्रबंधन

• आग : शोर मचाकर सतर्क करें, मुंह पर गीला कपड़ा, फर्श के करीब झुककर चलें, लिफ्ट नहीं, 101 पर कॉल। बंद होती लिफ्ट में हाथ-पैर डालना जानलेवा है।

• भूकंप व तूफान : Drop, Cover, Hold। तूफान में पेड़, खंभे, कच्ची दीवारों से दूर।

• सड़क सुरक्षा एवं नए खतरे : हेलमेट, सीट बेल्ट, मुड़ते समय पीछे देखना, जेब्रा क्रॉसिंग। विशेष : सड़क पर ईयरफोन, ई-रिक्शा का ब्लाइंड स्पॉट, नशे में वाहन और रोड-रेज में उलझने के बजाय 112 पर कॉल करना – धैर्य भी सुरक्षा है।

• हीटवेव व प्राथमिक उपचार : 45-48°C लू में सिर ढकना, ORS, पानी। बेहोशी में भीड़ हटाना, हवादार स्थान, पैर हल्के ऊंचे और बेसिक CPR।

3. संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण : मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक गुण

• भावनात्मक परिपक्वता : अपनी खूबियों-कमजोरियों का निष्पक्ष आकलन, उम्र के अनुसार मैच्योरिटी, प्राथमिकताओं पर फोकस, तनाव में इमोशन कंट्रोल, आशावादी और खुशनुमा रहना, अनुभवों से सीखना। विशेष : मदद मांगने का साहस – तनाव, नींद न आना, घबराहट होने पर दोस्त, शिक्षक या काउंसलर से बात करना कमजोरी नहीं, पहला उपचार है। विशेषकर प्रतिस्पर्धी माहौल में पीयर-सपोर्ट क्लब जरूरी है।

• सामाजिक कौशल एवं नेतृत्व : हर पृष्ठभूमि के साथियों से Friendly & Mix-up व्यवहार, विकट स्थिति में टीम संभालना, अपनी बात तार्किक रूप से Convince करना, बिना हिचक सही-गलत में फर्क कर फैसला लेना। विशेष : समावेशी सोच – दिव्यांग साथियों, अलग भाषा-बोली के साथियों के प्रति संवेदनशीलता और कृतज्ञता-सेवा भाव।

• बौद्धिक सतर्कता : हर परंपरा के पीछे वैज्ञानिक लॉजिक, रोज अखबार, जनरल इश्यूज और समसामयिक घटनाओं की समझ, ग्रुप डिस्कशन और पब्लिक स्पीकिंग से सोच का विस्तार।

4. जीवन शैली, अनुशासन और 150% का सिद्धांत

• 150% का स्वर्णिम सिद्धांत : 100% काम और 50% अतिरिक्त – थोड़ी ज्यादा तैयारी, ज्यादा ईमानदारी, ज्यादा अभ्यास और अनुशासन ही भीड़ से अलग करता है।

• फोकस और डिजिटल डिटॉक्स : जरूरी काम पहले। सोशल मीडिया तुलना और ट्रोलिंग से दूरी। 20-20-20 नियम और रोज 1 घंटा नो-स्क्रीन।

• स्वास्थ्य ही सर्वोच्च पूंजी : 7-8 घंटे नींद, मौसमी आहार, मिलेट्स बाजरा-ज्वार, जंक फूड-कोल्ड ड्रिंक से परहेज, रोज 30 मिनट Walk/योग – ताकि छात्र Physically & Medically Fit रहे।

• सह-शैक्षणिक : NCC, NSS, स्काउट-गाइड, खेलकूद अनिवार्य। संगीत, चित्रकला, लेखन, बागवानी जैसी हॉबी तनाव घटाती है। व्यक्तित्व महंगे परिधानों से नहीं, साफ-सुथरे शालीन पहनावे से निखरता है।

5. वर्तमान युग के नए अनिवार्य विषय

फेक न्यूज व सूचना साक्षरता : वायरल खबर की सोर्स-तारीख जांचना।

• वित्तीय साक्षरता : बचत, पारिवारिक बजट, फिजूलखर्ची से बचाव और छोटा स्कूल-बैंक/गुल्लक अभ्यास।

• पर्यावरण संवेदनशीलता : AQI की समझ, जल संरक्षण, सिंगल-यूज प्लास्टिक त्याग, गीला-सूखा कचरा पृथक्करण।

• नागरिक कर्तव्य : Voter ID, RTI और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा।

• हुनर एवं उद्यमिता : NEP 2020 के अनुसार हर छात्र स्कूल स्तर पर कम से कम एक वोकेशनल स्किल में पारंगत हो।

निष्कर्ष : भविष्य की राह

“किताबें हमें सिखाती हैं कि क्या सोचना है, किंतु जीवन-कौशल सिखाता है कि कैसे सोचना है, कैसे सुरक्षित रहना है और जीवन की हर विकट चुनौती का डटकर सामना कैसे करना है।”

समय की मांग है कि हर विद्यालय में प्रति माह एक ‘जीवन-कौशल पीरियड’, मॉक ड्रिल और खुली परिचर्चा हो, जिसमें छात्र-शिक्षक-अभिभावक साथ हिस्सा लें। जब हम बच्चों को अंकों के साथ-साथ सुरक्षा, मानसिक सुदृढ़ता और सामाजिक उत्तरदायित्व से लैस करेंगे, तभी वे आत्मनिर्भर, सुरक्षित भारत का निर्माण कर सकेंगे।

✍️लेखक : परमानन्द गोयल , कोटा (राजस्थान)

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