केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के साथ जॉब्स एट योर डोरस्टेप: ए जॉब्स डायग्नोस्टिक्स फॉर यंग पीपल इन सिक्स स्टेट्स शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की। इस कार्यक्रम में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री संजय कुमार, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सचिव श्री अतुल कुमार तिवारी, विश्व बैंक, भारत के कंट्री डायरेक्टर श्री ऑगस्टे तानो कौमे, विश्व बैंक, भारत की प्रमुख शिक्षा विशेषज्ञ श्रीमती शबनम सिन्हा, मंत्रालयों के अधिकारी और कुछ स्कूलों के प्रधानाचार्य भी मौजूद थे।धर्मेंद्र प्रधान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छह राज्यों पर विस्तृत रिपोर्ट के लिए विश्व बैंक की टीम की सराहना की। उन्होंने विश्व बैंक की टीम को अखिल भारतीय रूपरेखा अपनाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि कौशल और नौकरियों पर इस तरह की गहन जांच हितधारकों को नई वास्तुकला बनाने और हमारी जनसंख्या को सशक्त बनाने के लिए प्रगतिशील नीतियां बनाने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने नौकरियों और रोजगार की परिभाषा को व्यापक बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। श्री प्रधान ने कहा कि रूपरेखा को व्यापक बनाया जाना चाहिए और आर्थिक अवसरों और सशक्तिकरण के परिप्रेक्ष्य से देखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत को वैश्विक कौशल केंद्र में परिवर्तित के दृष्टिकोण के प्रति आभार व्यक्त करते हुए, मंत्री ने कहा कि देश की जनसंख्या वैश्विक अर्थव्यवस्था का चालक होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए कौशल विकास की शुरुआत स्कूलों से ही होनी चाहिए और एनईपी 2020 में स्कूलों में कौशल विकास को मुख्यधारा में लाने की परिकल्पना की गई है। प्रधान ने यह भी कहा कि तकनीकी व्यवधान नौकरियों और आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति को बदल देंगे और भविष्य के लिए कार्यबल को लगातार कौशल प्रदान करना और पुनः कौशल प्रदान करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्व की कौशल राजधानी के रूप में उभरने के लिए हमारी जनसंख्या को कौशल प्रदान करने, कौशल स्तर में वृद्धि करने और पुनः कौशल प्रदान करने के लिए एक ‘समग्र सरकार’ दृष्टिकोण और सहयोगात्मक रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।






