Saturday, April 18, 2026
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 रामनवमी -रचनाकार: बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”

 रामनवमी

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अवतरण-दिवस प्रभु श्री राम का चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी ।

हुई मगन है स्वर्ण-धरा वो पर्व पुनीता नवमी ।।

तारनहार जगत के जो माधुर्य-रुप बरसाए ।

आलौकिक उस देख छटा को मन-मन्दिर हर्षाए ।।

नित्य-नियम-संयम-मर्यादा का एक पाठ पढ़ाया ।

नवधा भक्ति कर प्रदान शबरी का मान बढ़ाया ।।

अनमोल उदाहरण प्रेम का शबरी के जूठे बैर यही ।

भाव शुद्ध हों तो प्रभु अपनाने में करते देर नहीं ।।

करुणा-सागर-दीन-बंधु की महिमा अपरंपार है ।

हृदय से जो करें स्मरण हो उसका बेड़ापार है ।।

अकारण ही दुष्टों को जो पहुँचादे निज धाम हैं ।

सरकार राघवेन्द्र की यह लीला लगती ललित ललाम है ।।

मन-मन्दिर ही पुरी अयोध्या मन-मन्दिर त्रेता युग है ।

करें रमण सबके उर में प्रभु डालते चन्ना-चुग हैं ।।

सबका रग़-रग़ रहें राममय भक्ति की रस-धार बहे ।

सर्वान्तर्यामी राघव “पुखराज” तिहाँरी शरण गहे ।।

(स्वरचित/मौलिक/सर्वाधिकार सुरक्षित)

(रचनाकार: बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”)

कोटा (राजस्थान)

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