Tuesday, June 2, 2026
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माँ अम्बिके वरदायनी – बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”

माँ अम्बिके वरदायनी

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शक्ति-स्वरूपा-ज्योति-स्वरुपा,

माँ अम्बे वरदायनी ।

नव रुपों में विद्यमान माँ,

तू ही मंगलकारिणी ।।

अष्ठ-भुजाओं वाली माता,

तेरी जयजयकार है ।

सिंह पर होती सवार माँ,

करती बेड़ापार है ।।

कर में खड्ग-खप्पर धारे माँ,

लाल सिन्दूर-चूँदर धारें ।

ध्वजा-नारियल-पंचमेवा,

जननी तव चरणों पर वारें ।।

शेल-सुता-ब्रह्मचारिणी अम्बे,

चंद्रघंटा-कुष्माण्डा,

स्कंदमाता-कात्यायनी,

कालरात्रि जगदम्बिका ।।

महागौरी और सिद्धिदात्री,

लाज रखो हे मेरी माँ ।

तेरे चरणों के अतिरिक्त,

अन्य सहारा पाऊँ कहाँ ।।

ज्ञान-हीन-गुण-हीन तेरा,

कुछ छुपा नहीं तुझसे माता ।

अम्बिके वरदायनी माँ,

बेटे से रखना नाता ।।

(स्वरचित/मौलिक/अप्रकाशित)

(रचनाकार: बृजेन्द्र सिंह झाला”पुखराज”)

कोटा (राजस्थान)

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