जितेंद्र कुमार शर्मा
बारां/अंतर्राष्ट्रीय समन्वयी संत, आध्यात्मिक चिंतक एवं “मिशन ऑफ कम्युनल हार्मनी” के प्रणेता परम् पूज्यनीय श्री सिद्दीक बाबा के 84वें जन्मदिवस एवं गुरुपूर्णिमा महोत्सव का आयोजन आगामी 25 एवं 26 जुलाई को बारां स्थित मदनी आश्रम, सत्संग मार्ग पर अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं सर्वधर्म समभाव की भावना के साथ किया जाएगा।
यह दो दिवसीय आयोजन श्री सिद्दीक बाबा लोक कल्याण संस्थान, बारां एवं सांप्रदायिक सद्भावना संस्थान, बारां के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगा। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य संत श्री सिद्दीक बाबा द्वारा स्थापित “मिशन ऑफ कम्युनल हार्मनी” को जन-जन तक पहुँचाना तथा मानवता, प्रेम, सेवा, करुणा, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के मूल्यों को सशक्त करना है।
आयोजकों ने बताया कि परम् पूज्यनीय श्री सिद्दीक बाबा ने अपने संपूर्ण जीवन में धर्म को विभाजन का नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने का माध्यम माना। उन्होंने विभिन्न धर्मों, संप्रदायों और संस्कृतियों के बीच संवाद, विश्वास और भाईचारे का वातावरण निर्मित करने का सतत प्रयास किया। उनका संदेश रहा कि “मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है तथा सभी धर्म प्रेम, करुणा और सत्य का मार्ग सिखाते हैं।” यही विचार आज भी उनके अनुयायियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
25 जुलाई को गुरुदेव के जन्मदिवस पर समाज के जरूरतमंद एवं दरिद्र नारायण की सेवा के लिए निःशुल्क वस्त्र वितरण किया जाएगा। इस सेवा कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि किसी भी आध्यात्मिक साधना की सार्थकता तभी है जब वह पीड़ित, वंचित और जरूरतमंद लोगों के जीवन में आशा और सम्मान का संचार करे।
26 जुलाई को गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर सर्वधर्म प्रार्थना एवं आध्यात्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। कार्यक्रम में वैदिक हवन, पवित्र कुरान शरीफ की ख्वानी, श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ तथा पवित्र बाइबिल के संदेशों का वाचन किया जाएगा। यह आयोजन भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत और “सर्वधर्म समभाव” की जीवंत परंपरा का प्रतीक होगा।
धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत भोग, अरदास एवं सर्वधर्म सद्भावना संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु, संत, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य नागरिक अपने विचार व्यक्त करेंगे। संगोष्ठी का प्रमुख विषय होगा— “मानवता, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के निर्माण में आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका।”
आयोजन के अंत में सभी श्रद्धालुओं एवं उपस्थित नागरिकों को भोग परसादी वितरित की जाएगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न धर्मों, जातियों एवं समाजों के लोगों की सहभागिता अपेक्षित है, जिससे संत श्री सिद्दीक बाबा का सर्वधर्म सद्भाव, प्रेम और मानव एकता का संदेश और अधिक व्यापक रूप से समाज तक पहुँच सके।
संस्थान ने सभी श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, बुद्धिजीवियों एवं नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता, भाईचारे और मानवता के इस महापर्व में सहभागी बनें तथा संत श्री सिद्दीक बाबा के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें।






