Tuesday, June 30, 2026
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देशभर में कोटा विश्वविद्यालय को मिली विशिष्ट पहचान, उज्बेकिस्तान की सिल्क रोड यूनिवर्सिटी ने चुना एकमात्र भारतीय संस्थान

5 पूर्ण छात्रवृत्तियों पर होगा चयन, कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने बताया अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि

– भारत सिंह चौहान

कोटा। पर्यटन एवं सांस्कृतिक विरासत शिक्षा के क्षेत्र में कोटा विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। उज्बेकिस्तान के समरकंद स्थित सिल्क रोड इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ टूरिज्म एंड कल्चरल हेरिटेज ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पूरे भारत में केवल कोटा विश्वविद्यालय को अपने साझेदार संस्थान के रूप में चयनित किया है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) बी.पी. सारस्वत के मार्गदर्शन तथा पर्यटन एवं आतिथ्य विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा के प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है।

विश्वविद्यालय के प्रथम उपकुलपति (प्रशासन) डी. नसीमोव ने प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा को भेजे आधिकारिक पत्र में भारतीय विद्यार्थियों एवं स्नातकों के बीच इस अवसर का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा इच्छुक अभ्यर्थियों के चयन में सहयोग का अनुरोध किया है। भारत के विद्यार्थियों के लिए पांच पूर्ण ग्रांट आधारित छात्रवृत्तियां उपलब्ध कराई गई हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 1 अगस्त 2026 है तथा नया शैक्षणिक सत्र सितंबर से प्रारंभ होगा।

कुलगुरु प्रो. (डॉ.) बी.पी. सारस्वत ने कहा कि यह उपलब्धि कोटा विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय साख, शैक्षणिक गुणवत्ता और वैश्विक सहयोग की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को वैश्विक अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा, शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने अधिकाधिक विद्यार्थियों से इस अवसर का लाभ उठाने का आह्वान किया।

प्रो. (डॉ.) अनुकृति शर्मा ने बताया कि पर्यटन एवं प्रबंधन सहित संबंधित विषयों के प्रति विद्यार्थियों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। चयनित विद्यार्थियों को प्रतिमाह 500 अमेरिकी डॉलर छात्रवृत्ति, 100 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह छात्रावास व्यय के लिए, भारत-उज्बेकिस्तान आने-जाने हेतु इकोनॉमी क्लास का निःशुल्क हवाई टिकट तथा उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों से परिचित कराने के लिए वर्ष में दो अध्ययन यात्राएं कराई जाएंगी। प्रत्येक अध्ययन यात्रा के लिए 100 अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त प्रदान किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि चयनित विद्यार्थी पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन, पुरातत्व, कला एवं स्थापत्य स्मारकों की बहाली, संग्रहालय विज्ञान, संरक्षण तथा ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव जैसे विषयों में मास्टर डिग्री प्राप्त करेंगे। यह छात्रवृत्ति योजना उज्बेकिस्तान सरकार की अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग नीति के तहत संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक आदान-प्रदान, सांस्कृतिक सहयोग और वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना है।

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