देश में साइबर अपराध का बढ़ता खतरा: 5 वर्षों में 3.57 लाख मामले दर्ज, 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की ठगी, जानिए कैसे बचें साइबर जालसाजों से
मयूर टाइम्स न्यूज़ विशेष
नई दिल्ली। डिजिटल इंडिया अभियान के साथ देश में ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, ई-वॉलेट और इंटरनेट आधारित सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। जहां एक ओर डिजिटल लेनदेन ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों ने भी नई-नई तकनीकों के जरिए आम नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। संसद में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़े इस बढ़ते खतरे की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।
लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 से 2024 के बीच देशभर में 3,57,250 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए। वहीं 2021 से 2025 के दौरान साइबर ठगों ने नागरिकों से 55,050 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। इस अवधि में 65.89 लाख से अधिक शिकायतें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से प्राप्त हुईं।
हालांकि, राहत की बात यह है कि समय पर शिकायत और त्वरित कार्रवाई के कारण 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बचाने में सफलता मिली। यह उपलब्धि राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), बैंकों और विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम मानी जा रही है।
साइबर ठगी होते ही क्या करें?
यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी हो जाती है, तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें।
– सबसे पहले एक घंटे के भीतर 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
– इसके बाद प्राप्त एसएमएस में दिए गए लिंक या cybercrime.gov.in पर जाकर 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन शिकायत पूरी करें।
– शिकायत दर्ज होते ही एक डिजिटल टिकट तैयार होता है, जिसके माध्यम से संबंधित बैंक और भुगतान कंपनियों को तत्काल अलर्ट भेजा जाता है। इससे संदिग्ध लेनदेन को रोकने और राशि बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
– बैंक खाते का पासबुक, लेनदेन का स्क्रीनशॉट, यूपीआई आईडी, मोबाइल नंबर और अन्य संबंधित जानकारी सुरक्षित रखें और शिकायत के साथ संलग्न करें।
साइबर ठग कैसे बनाते हैं लोगों को शिकार?
आज के साइबर अपराधी पहले की तुलना में कहीं अधिक संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हैं। वे अलग-अलग तरीकों से लोगों को धोखा देते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
– फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना।
– केवाईसी अपडेट, पैन लिंक या आधार अपडेट के नाम पर ठगी।
– बिजली बिल, गैस कनेक्शन या टैक्स भुगतान का फर्जी संदेश भेजना।
– व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर नौकरी, लॉटरी, इनाम और निवेश के झूठे ऑफर।
– फर्जी निवेश ऐप और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म।
– ओएलएक्स, फेसबुक मार्केटप्लेस और ई-कॉमर्स धोखाधड़ी।
– स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाना।
– सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर परिचितों से पैसे मांगना।
– डिजिटल अरेस्ट, सीबीआई, पुलिस या ईडी अधिकारी बनकर डराकर पैसे वसूलना।
साइबर ठगी से कैसे बचें?
विशेषज्ञों के अनुसार थोड़ी सी सावधानी बड़ी आर्थिक हानि से बचा सकती है।
– किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी, एटीएम पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड कभी साझा न करें।
– बैंक, आरबीआई, पुलिस या सरकारी एजेंसियां फोन पर गोपनीय बैंकिंग जानकारी नहीं मांगतीं।
– किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांच लें।
– केवल आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।
– मोबाइल और बैंकिंग ऐप को हमेशा अपडेट रखें।
– मजबूत पासवर्ड रखें और जहां संभव हो टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का उपयोग करें।
– किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें।
– सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी सीमित मात्रा में साझा करें।
– निवेश करने से पहले संबंधित कंपनी या प्लेटफॉर्म की वैधता अवश्य जांचें।
– बैंक खाते और यूपीआई लेनदेन के एसएमएस अलर्ट हमेशा चालू रखें।
परिवार के बुजुर्ग और बच्चों को भी करें जागरूक
साइबर अपराधी अक्सर बुजुर्गों, छात्रों और तकनीकी जानकारी कम रखने वाले लोगों को आसान निशाना बनाते हैं। परिवार के सभी सदस्यों को समय-समय पर साइबर सुरक्षा की जानकारी देना, संदिग्ध कॉल और संदेशों की पहचान सिखाना तथा किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले सलाह लेने की आदत विकसित करना बेहद जरूरी है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
डिजिटल सुविधाओं का लाभ तभी सुरक्षित है, जब उपयोगकर्ता सतर्क रहें। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए हर व्यक्ति को ऑनलाइन लेनदेन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यदि कभी भी साइबर ठगी का संदेह हो तो देर न करें—तुरंत 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। आपकी त्वरित कार्रवाई आपकी मेहनत की कमाई बचा सकती है।






