मातृभूमि
मातृभूमि को वंदन नमन।
कर दूँ न्योंछावर तन -मन -धन।
मातृभूमि मुझकों ये मेरी
प्राणों से भी प्यारी है ।
इसकी शान तो देखो,
सारे जग से निराली हैं ।
नगराज से हिंद सागर तक
कितनी विविधाताए फैली है ।
भाषा,वेशभूषा,परम्पराएं
अलग -अलग भायी है ।
वेदों का ज्ञान इसका ,
ईश्वर से मिलवाता है ।
मेरे देश का कण -कणमुझकों स्वर्ग का आभास करवाता है ।
गरिमा राकेश गर्विता
कोटा ,राजस्थान






