युग बदलेगा, हम बदलेंगे : हाड़ौती के गौरव ओम बिरला ने गायत्री परिवार के शताब्दी मंच से दिया विकसित भारत का मंत्र
दीक्षांत समारोह से शताब्दी महोत्सव तक लोकसभा अध्यक्ष का शांतिकुंज से पुराना नाता, डॉ. चिन्मय पंड्या के विज्ञान और अध्यात्म को जोड़ने के प्रयासों की की सराहना
✍️ डॉ नयन प्रकाश गांधी युवा मैनेजमेंट विश्लेषक पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट ,मीडिया स्तंभकार,एलुमनाई देव संस्कृति विश्विद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार
भारत के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भारतीय राजनीति के ऐसे शख्सियत हैं जिनका जीवन सार्वजनिक सेवा, संसदीय मर्यादा और सांस्कृतिक मूल्यों के संगम का प्रतीक है। राजस्थान के कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र से लगातार जनप्रतिनिधि, कुशल प्रशासक और भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च सदन के संरक्षक के रूप में उन्होंने सदैव परंपरा और आधुनिकता, अध्यात्म और विज्ञान के बीच सेतु बनाने का कार्य किया है। उनका गायत्री परिवार से जुड़ाव इसी सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की भावना का विस्तार है।
भारतीय संस्कृति में सौ वर्ष केवल कालगणना नहीं, तप, त्याग और संकल्प की सिद्धि का प्रतीक होते हैं। परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के धरती पर अवतरण के सौ वर्ष, अखण्ड दीपक के प्राकट्य के सौ वर्ष और परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की तप-साधना के सौ वर्ष का यह त्रिवेणी संगम उसी सिद्धि का पर्व है।नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस शताब्दी महोत्सव में जब लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी ने बीस हजार से अधिक श्रद्धालुओं के बीच माता जी के सम्मान में भारत सरकार द्वारा जारी स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया, तो वह दृश्य केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं था, वह राष्ट्र द्वारा एक आध्यात्मिक माँ के त्याग को दिया गया सम्मान था। इस अवसर पर श्री बिरला जी का गायत्री परिवार से जो आत्मीय जुड़ाव दिखा, वह आकस्मिक नहीं, वर्षों की साधना और संवाद का परिणाम है।
दीक्षांत से लेकर शताब्दी तक की यात्रा
बिरला का शांतिकुंज और देव संस्कृति विश्वविद्यालय से संबंध पुराना है।1 नवंबर 2022 को हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार में आयोजित छठे दीक्षांत समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बतौर मुख्य अतिथि पधारे थे और उन्होंने विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की थी। उस मंच से उन्होंने कहा था कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ संस्कार भी दिया जाता है और यहीं जीवन प्रबंधन भी सिखाया जाता है।उसके बाद वे शांतिकुंज में आयोजित अखण्ड ज्योति यात्रा सम्मेलन में भी सम्मिलित हुए। वहाँ उन्होंने कहा कि अखण्ड ज्योति यात्रा देश में अध्यात्म और ज्ञान का संदेश फैलाएगी और चरित्र निर्माण में सहायक होगी। उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उन्हें अनेक अवसरों पर पावन अखण्ड दीपक के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह वही दीपक है जो सौ वर्षों से अनवरत जल रहा है। और अब 31 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में आयोजित शताब्दी महोत्सव में उनकी उपस्थिति इस यात्रा का तीसरा पड़ाव है।

डॉ. चिन्मय पंड्या जी के लिए कहे गए ऐतिहासिक वाक्य
इस शताब्दी समारोह के सबसे महत्वपूर्ण क्षण वे थे जब बिरला ने मंच पर अपने साथ खड़े इस महोत्सव के दलनायक और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि मैं डॉ. चिन्मय पंड्या की सराहना करता हूँ, जिन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को विश्व तक पहुँचाया है, साथ ही लोगों को विज्ञान और तकनीक के विकास से भी परिचित कराया है।

यह कथन केवल शिष्टाचार नहीं था। यह एक राजनेता द्वारा एक आध्यात्मिक युवा वैज्ञानिक की दृष्टि को दिया गया सम्मान था। बिरला ने आगे कहा कि गायत्री परिवार ने भारत की आध्यात्मिक विरासत और मूल्यपरक दर्शन को विश्व के कई देशों तक पहुँचाया है और समकालीन आवश्यकताओं के अनुसार व्यक्ति, परिवार और सामाजिक विकास के आदर्शों को आगे बढ़ाया है।उन्होंने यह भी कहा कि यह अखंड ज्योति तब तक जलती रहेगी, जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रकाश नहीं पहुँच जाता। और कामना की कि गाँव-गाँव में परिवार निर्माण और व्यक्ति निर्माण के जरिए राष्ट्र निर्माण का संकल्प पूरा हो।

संसद और शांतिकुंज के बीच सेतु बने डॉ. पंड्या
यह सराहना एकतरफा नहीं रही है। डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने भी लोकसभा अध्यक्ष के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा है। अप्रैल 2025 में नई दिल्ली में सौजन्य भेंट के दौरान उन्होंने श्री बिरला जी को पूज्य गुरुदेव द्वारा रचित युग निर्माण सत्संकल्प और नवयुग का संविधान पुस्तक भेंट की और आग्रह किया कि इस आध्यात्मिक घोषणापत्र को देश के सभी सांसदों तक पहुँचाया जाए।जनवरी 2026 और उससे पूर्व भी उन्होंने श्री बिरला जी को शताब्दी वर्ष और एआई एवं अध्यात्म विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया। हर भेंट में श्री बिरला जी ने भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार में गायत्री परिवार के योगदान को सराहा।
माता जी का दर्शन और विकसित भारत का मंत्र
अपने संबोधन में बिरला ने माता भगवती देवी शर्मा जी को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन मातृत्व, करुणा, तप, समर्पण और सेवा का प्रतीक है। 1975 में जब देश में नारी चेतना की बात भी कठिन थी, तब उन्होंने महिला जागरण अभियान आरंभ किया। उन्होंने महिलाओं को अपनी शक्ति पहचानने और समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी।आज जब विकसित भारत की बात होती है तो चरित्र निर्माण, मूल्यपरक शिक्षा और सामाजिक समरसता के बिना वह यात्रा अधूरी है। गायत्री परिवार ने व्यक्ति निर्माण से परिवार निर्माण और परिवार निर्माण से राष्ट्र निर्माण का जो मंत्र दिया, वही आज प्रासंगिक है। अखण्ड दीपक का प्रकाश केवल मंदिर का प्रकाश नहीं, वह युग निर्माण का संकल्प है। जब लोकसभा के अध्यक्ष जैसा व्यक्ति इस अखण्ड ज्योति के सामने नतमस्तक होता है, तो यह इस बात का प्रमाण है कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, आध्यात्मिक चेतना से भी निर्मित होगा।






