‘घटना आपके हाथ में नहीं, रंग भरना आपके हाथ में’: भगवान राम के चरित्र से सीखें
जीवन बदलना है तो रोज सुबह सिर्फ 15 मिनट पढ़ें पुस्तक: मोटिवेशनल गुरु सोनू शर्मा
कोटा, 1 नवम्बर।राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 के अंतर्गत रविवार शाम को विजयश्री रंगमंच पर एक भव्य मोटिवेशनल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध मोटिवेशनल गुरु सोनू शर्मा रहे। जिन्होंने रामायण के विभिन्न पात्रों के जीवन चरित्र और प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को जीवन के अनमोल सूत्र समझाए। कार्यक्रम में ‘जय श्री राम’ के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत में दीप प्रज्जवलित कर अतिथियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर शिक्षाविद कुलदीप श्रीवास्तव, आनंद राठी, दिलीप अरोड़ा, एसटी मोर्चा बीजेपी के अशोक मीणा, राज दाधीच, डॉ. अंशुमान अग्रवाल और डॉ. रुद्रेश तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलन किया। वहीं, आयुक्त ओपी मेहरा, मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर, कमल मालव और जितेंद्र बग्गा ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य वक्ता सोनू शर्मा ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि कोटा का दशहरा मेला देश के चुनिंदा और प्रतिष्ठित मेलों में से एक है। उन्होंने कहा, “जिस दशहरा मेले में भगवान राम की चर्चा न हो, वहां आना बेकार है।” उन्होंने भगवान राम के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि राम की कृपा हम सब पर हमेशा बनी रहती है।
जीवन के बड़े फलसफे को समझाते हुए सोनू शर्मा ने कहा कि जीवन में किसी घटना का घटना हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन उस घटना में रंग भरना पूरी तरह हमारे अपने हाथ में होता है। उन्होंने भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि एक तरफ जहां राम को सिंहासन देने की पूरी तैयारी चल रही थी, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अचानक वनवास मिल गया। कुदरत किसी को नहीं छोड़ती। लेकिन जिस मां ने उन्हें वनवास दिया, उनके प्रति भी राम के मन में कभी कोई द्वेष नहीं आया। इसी एक घटना ने भगवान श्री राम को ‘पुरुषोत्तम श्री राम’ बना दिया। इस दौरान श्रीराम के जयकारों के साथ तालियां गूंजती रहीं।
रामायण के पात्रों से सीखे जीवन के सूत्र
सोनू शर्मा ने रामायण की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामायण का एक-एक पात्र मनुष्य के जीवन की दिशा बदल सकता है। उन्होंने विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए जीवन के सूत्र समझाए।
– परिवार और संपत्ति विवाद: उन्होंने आज के समाज का जिक्र करते हुए कहा कि आज भाइयों के बीच 70% कोर्ट केस जमीन-जायदाद के मामलों के होते हैं। इसके विपरीत, रामायण हमें सिखाती है कि एक भाई सहर्ष राजपाट दे रहा है और दूसरा भाई उसे लेने को तैयार नहीं है। भरत ने कहा था गुरु आज्ञा से सिंहासन ले लिया, तो धरती पाताल में समा जाएगी। ‘तुम मम प्रिय भारत सम भाई’ की भावना ही परिवार को जोड़ती है।
– संकट और शक्ति का संतुलन: हनुमान जी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में जो भी कार्य करें, हमेशा खुश होकर करें। उदास लोगों के पास नकारात्मक ऊर्जा (चांडाल योग) मंडराती है। उन्होंने समझाया कि हनुमान जी को ब्रह्मांड का कोई भी अस्त्र-शस्त्र यहां तक कि ब्रह्मास्त्र भी नहीं बांध सकता था, लेकिन वे फिर भी ब्रह्मफाश में बंध गए क्योंकि वे भली-भांति जानते थे कि अपनी ताकत कहां लगानी है और कहां दिखानी है। यह समझना जरूरी है कि बल कहां लगाना है और बुद्धि का प्रयोग कहां करना है।
– चुनौतियां और सफलता: उन्होंने कहा कि जब कुदरत आपको कुछ बहुत बड़ा देने वाली होती है, तो वह आपकी परीक्षा भी उतनी ही बड़ी चुनौतियों के साथ लेती है। इसलिए अपने लक्ष्य (गोल) की तरफ बढ़ें तो बीच में विश्राम या आराम नहीं किया जा सकता।
लंका दहन और असफलता से सीख
सुंदरकांड का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब जीवन में अप्रत्याशित घटनाएं घटें, तो समझें कि इसके पीछे किसी और की बड़ी योजना जुड़ी हुई है। हनुमान जी द्वारा लंका दहन के उदाहरण को समझाते हुए उन्होंने कहा कि रावण को हनुमान जी की पूंछ से बहुत तकलीफ थी। वास्तव में हर व्यक्ति को समाज में दूसरे की ‘पूछ’ (यश या प्रगति) से तकलीफ होती है। यदि कोई आपकी पूंछ या प्रतिष्ठा को उखाड़ने या गिराने की कोशिश करे, तो उससे लड़ने के बजाय और अधिक ऊंचा उड़ने का प्रयास करें।
जीवन बदलने वाला मूलमंत्र: 15 मिनट अध्ययन
कार्यक्रम के अंत में सोनू शर्मा ने उपस्थित जनसमूह को एक अत्यंत व्यावहारिक और प्रभावशाली मंत्र देते हुए कहा कि सुबह उठकर सबसे पहले कम से कम 15 मिनट कोई भी अच्छी पुस्तक जरूर पढ़ें। यह छोटी सी आदत आपके पूरे जीवन को बदलकर रख देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि विषय कोई भी हो सकता है, लेकिन यह पठन-पाठन की आदत अपने जीवन का हिस्सा जरूर बनाएं।
कार्यक्रम के दौरान ‘जय श्री राम’ और जय हनुमान के उद्घोष से पूरा विजय श्री रंगमंच गूंज उठा और श्रोताओं ने इस प्रेरक सत्र का भरपूर आनंद लिया।






