पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने एक सुर में भरी हुंकार—जंगल, जमीन और जल स्रोतों का विनाश बर्दाश्त नहीं
जयपुर/कोटा/बारां, 28 सितम्बर।राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और सघन वनों पर मंडराते संकट के खिलाफ जन आक्रोश मुखर हो उठा है। शाहबाद तहसील के ग्राम कलोनी में प्रस्तावित ‘शाहपुरा पम्पड स्टोरेज पावर प्लांट’ के विरोध में शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बाराँ द्वारा चलाए जा रहे ‘शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन’ को क्षेत्रवासियों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। युवा पर्यावरण प्रेमी गब्बर सिंह यदुवंशी और साथियों के नेतृत्व में 237 गांवों की ‘जन क्रांति पदयात्रा’ के कस्बाथाना पहुंचने पर जोरदार स्वागत हुआ। यहां आयोजित आमसभा में 200 से 300 ग्रामीणों, युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया।
सभा के बाद कस्बे के श्रीराम रंगमंच, पुराना बस स्टैंड से निमझिरिया तक विशाल जनजागरण रैली निकाली गई। गगनभेदी नारों—”शाहबाद का जंगल बचाना है, आने वाली पीढ़ी का भविष्य सजाना है” और “जंगल-जमीन हमारा है, विनाशकारी प्रोजेक्ट वापस लो” के साथ पदयात्रियों ने मुख्य मार्गों का भ्रमण किया।
सभा को संबोधित करते हुए यज्ञदत्त हाड़ा (संरक्षक, चम्बल संसद, कोटा) ने कहा कि”शाहबाद घाटी हाड़ौती का फेफड़ा और जीवनरेखा है। विकास के नाम पर इस सघन वन और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को उजाड़ने का षड्यंत्र कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
बृजेश विजयवर्गीय (समन्वयक, चम्बल संसद) ने कहा कि”ग्रीन एनर्जी की आड़ में जंगलों को नष्ट किया जा रहा है। भारी जल दोहन से स्थानीय जल स्रोत खत्म हो जाएंगे, यह कानूनी और पर्यावरणीय दोनों स्तरों पर अन्याय है।”
गब्बर सिंह यदुवंशी (संयोजक, जन क्रांति पदयात्रा) ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि”237 गांवों की जनता एकजुट है। पुरखों द्वारा सहेजे गए जंगलों को कॉरपोरेट के हवाले नहीं होने देंगे; प्लांट रद्द होने तक यह पदयात्रा और संघर्ष जारी रहेगा।”
सभा को संबोधित करते हुए विट्ठल सनाढ्य (बूंदी संयोजक, पीपुल्स फॉर अरावलीज) ने कहा कि”शाहबाद के जंगल दुर्लभ वन्यजीवों व औषधियों की धरोहर हैं। इस प्राकृतिक संपदा को मिटाने के गंभीर दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने होंगे।”
वहीं दूसरे अन्य वक्ता प्रमोद सोनी (संभागीय अध्यक्ष, लोक अधिकार मंच) ने मंच से लोगो , युवाओं को को संबोधित करते हुए कहा “यह सहरिया जनजाति और ग्रामीणों के जीवन व आजीविका पर सीधा हमला है। जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए यह लड़ाई निर्णायक होगी।”
जितेन्द्र कुमार शर्मा (संयोजक, इंटेक बाराँ चैप्टर) ने अपने संचालन में कहा कि”शाहबाद हमारी ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत है। इस औद्योगिक हस्तक्षेप से पारंपरिक जल तंत्र और वन्यजीव गलियारे पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे।”
डॉ. अमित सिंह राठौड़ व दिलीप नावर (सदस्य, चम्बल संसद) ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि “तकनीकी रूप से पम्पड स्टोरेज प्लांट से भारी जल संकट और वनों की कटाई होगी, जिससे क्षेत्रीय पर्यावरण व वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।”
रैली के दौरान पूरे कस्बे में व्यापारियों और आमजन ने पदयात्रियों का उत्साहवर्धन किया। संघर्ष समिति ने ऐलान किया कि जब तक कलोनी में प्रस्तावित शाहपुरा पम्पड स्टोरेज पावर प्लांट को पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाता, तब तक तहसील के शेष गांवों में यह जन क्रांति पदयात्रा निरंतर जारी रहेगी।





