जिला प्रमुख पद बढ़ने के बावजूद OBC प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ा, सरकार बताए आरक्षण का आधार : राजेन्द्र सैन
महावीर सेन जयस्थल बूंदी✍️
बूंदी/ राजस्थान में जिला प्रमुखों के पदों की संख्या 33 से बढ़कर 41 हो गई है, लेकिन OBC वर्ग के लिए आरक्षित जिला प्रमुखों के पदों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने का मुद्दा अब गंभीर सवाल बन गया है।
इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने भी सरकार से सवाल किया है कि जब वर्ष 2020 में जिला प्रमुखों के कुल 33 पदों में से 5 पद OBC वर्ग के लिए आरक्षित थे, तो अब कुल पद बढ़कर 41 होने के बाद OBC आरक्षित पदों की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई गई?
OBC एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य एवं ऑल इंडिया कांग्रेस OBC विभाग के पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर राजेन्द्र सैन ने कहा कि हाईकोर्ट का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि कुल पदों की संख्या बढ़ाई गई है तो आरक्षण के अनुपात और उसके आधार की भी पारदर्शी तरीके से समीक्षा होनी चाहिए।
सैन ने कहा कि 33 जिला प्रमुखों में 5 OBC पद आरक्षित थे, तो 41 पद होने पर उसी अनुपात को आधार माना जाए तो OBC आरक्षित पदों की संख्या बढ़नी चाहिए। केवल कुल पद बढ़ाना और OBC प्रतिनिधित्व को उसी स्तर पर रखना सामाजिक न्याय की भावना पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को न्यायालय के समक्ष यह स्पष्ट करना चाहिए कि OBC आरक्षण निर्धारित करने के लिए कौन-सा आंकड़ा, जनसंख्या अनुपात और कानूनी आधार अपनाया गया है।
OBC को जनसंख्या के अनुपात में मिले प्रतिनिधित्व
राजेन्द्र सैन ने सरकार से मांग की कि जिला प्रमुखों के आरक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए और OBC वर्ग को उसकी वास्तविक जनसंख्या एवं वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी वर्ग के अधिकारों को सीमित करने का माध्यम नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का संवैधानिक साधन है। इसलिए जिला प्रमुखों के बढ़े हुए पदों में OBC वर्ग की हिस्सेदारी भी न्यायसंगत रूप से बढ़नी चाहिए।
सैन ने कहा कि वे इस विषय को मजबूती से उठाते रहेंगे और OBC समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।






