कोटा। शहर की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े लक्खी बुर्ज को आकर्षक बनाने के लिए हाल ही में लगाई गई नई रोशनी रात के समय इसकी खूबसूरती में इजाफा कर रही है, लेकिन इन लाइटों को लेकर अब एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नई लाइटें दिन-रात लगातार जल रही हैं। रात में जहां इनकी रोशनी बुर्ज की सुंदरता बढ़ाती है, वहीं दिन में भी इनके लगातार चालू रहने से बिजली की अनावश्यक खपत हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन लाइटों को बंद करने और संचालन की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? स्थानीय स्तर पर ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आ रही, जिसके तहत दिन निकलने के बाद लाइटों को बंद किया जा सके। बताया जा रहा है कि लाइटें लगने के बाद से ही लगातार जलती दिखाई दे रही हैं।
बिजली बिल का भुगतान कौन करेगा?
लक्खी बुर्ज से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण मुद्दा बिजली के बिल का है। यदि पहले से ही बिजली का बिल बकाया है तो नई लाइटों के दिन-रात जलने से बिजली की खपत और खर्च और बढ़ेगा। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन नई लाइटों का अतिरिक्त बिजली बिल कौन जमा करेगा?
क्या इसके लिए नगर निगम की ओर से अलग से बजट या विद्युत व्यवस्था की गई है? क्या लाइटों के संचालन के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी नियुक्त है? इन सवालों का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है।
शॉर्ट सर्किट या दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन?
लगातार बिजली के उपकरणों के चालू रहने से सुरक्षा का पहलू भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि किसी तकनीकी खराबी, वायरिंग की समस्या या शॉर्ट सर्किट के कारण आग जैसी घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? खास बात यह भी बताई जा रही है कि मौके पर कोई चौकीदार या नियमित निगरानी की व्यवस्था नजर नहीं आती।
ऐसे में दिन-रात जल रही लाइटों की निगरानी कौन कर रहा है और तकनीकी खराबी होने पर सूचना देने तथा बिजली बंद कराने की जिम्मेदारी किसकी है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
करोड़ों के सौंदर्यीकरण के बाद व्यवस्था पर सवाल
लक्खी बुर्ज के सौंदर्यीकरण पर लगातार काम किया जा रहा है। उद्देश्य निश्चित रूप से शहर की ऐतिहासिक धरोहर को आकर्षक बनाना और पर्यटकों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है। लेकिन केवल सौंदर्यीकरण कर देना ही पर्याप्त नहीं है। उसके बाद रखरखाव, बिजली व्यवस्था, सुरक्षा और नियमित निगरानी की भी ठोस व्यवस्था जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लाइटें दिन में बंद कर दी जाएं और रात में निर्धारित समय पर ही चालू की जाएं तो बिजली की अनावश्यक खपत को रोका जा सकता है। इसके लिए टाइमर या ऑटोमेटिक सेंसर जैसी व्यवस्था भी की जा सकती है।
जिम्मेदार विभाग को लेना होगा संज्ञान
लक्खी बुर्ज पर लगातार जल रही नई लाइटों को लेकर अब संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। लाइटें किस एजेंसी ने लगाई हैं, उनका संचालन किसके जिम्मे है, बिजली का कनेक्शन किसके नाम पर है, प्रतिमाह अनुमानित कितना बिजली खर्च होगा और उसके भुगतान की जिम्मेदारी किस विभाग की होगी—इन सभी बिंदुओं पर जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।
सवाल सिर्फ लाइटों के दिन-रात जलने का नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के रखरखाव और जवाबदेही का है। यदि कोई व्यवस्था बनाई गई है तो उसका पालन भी होना चाहिए। अन्यथा सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाई गई ये लाइटें कहीं अनावश्यक बिजली खर्च और संभावित सुरक्षा जोखिम का कारण न बन जाएं।
स्थानीय नागरिकों ने संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर दिन में लाइटें बंद करने, रात में निर्धारित समय पर ही चालू रखने तथा नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि लक्खी बुर्ज की सुंदरता के साथ-साथ सार्वजनिक धन और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखा जा सके।






