के डी अब्बासी
कोटा, 25 अगस्त। नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के आगामी आम चुनाव के दौरान साइबर ठग मतदाताओं, चुनाव प्रत्याशियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों को निशाना बनाकर साइबर वित्तीय धोखाधड़ी तथा भ्रामक सूचनाएं फैला सकते हैं। इसे देखते हुए राजस्थान पुलिस ने आमजन को सतर्क रहने की अपील की है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार साइबर अपराधों की रोकथाम एवं आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं वी.के. सिंह ने बताया कि चुनाव के दौरान फर्जी लिंक, OTP, QR कोड, फिशिंग ई-मेल तथा डीपफेक और फेक न्यूज के जरिए ठगी की आशंका रहती है।
वोटर लिस्ट देखने के नाम पर भेजे जा सकते हैं फर्जी लिंक
जिला पुलिस अधीक्षक कोटा शहर तेजस्वनी गौतम (आईपीएस) ने आमजन से अपील की है कि साइबर ठग WhatsApp या SMS के जरिए “अपना नाम वोटर लिस्ट में देखें”, “आपका पोलिंग बूथ बदल गया है” जैसे संदेश भेजकर फर्जी लिंक पर क्लिक करा सकते हैं। ऐसे संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करें। मतदाता सूची एवं मतदान संबंधी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइटों का ही उपयोग करें।
OTP मांगने वाला ‘अधिकारी’ भी हो सकता है साइबर ठग
वोटर कार्ड अपडेट, सत्यापन या अन्य चुनावी प्रक्रिया के नाम पर फोन करने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, बैंक विवरण, UPI PIN या अन्य निजी जानकारी साझा नहीं करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि OTP साझा करना साइबर ठगी का कारण बन सकता है।
वायरल वीडियो और ऑडियो पर तुरंत विश्वास न करें
चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर नेताओं के नाम से फर्जी वीडियो, ऑडियो, भाषण और डीपफेक सामग्री वायरल की जा सकती है। किसी भी वीडियो या ऑडियो को आधिकारिक पुष्टि के बिना सच न मानें और उसे आगे फॉरवर्ड करने से पहले उसकी सत्यता जांचें।
प्रत्याशी और कार्यकर्ता सोशल मीडिया अकाउंट सुरक्षित रखें
चुनाव प्रत्याशियों एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं को Facebook, Instagram, X और WhatsApp जैसे सोशल मीडिया अकाउंट पर Two-Step Verification (2FA) सक्रिय रखने की सलाह दी गई है। मजबूत पासवर्ड रखें और अनजान लिंक के माध्यम से लॉगिन संबंधी जानकारी साझा नहीं करें।
QR कोड और चुनावी चंदे के नाम पर हो सकती है ठगी
डोनेशन एवं फंड रेजिंग के नाम पर भेजे जाने वाले UPI लिंक और QR कोड की अच्छी तरह जांच करें। किसी को पैसा प्राप्त करने के लिए अपना UPI PIN दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। QR कोड स्कैन करने अथवा PIN डालने से पहले लेन-देन की पूरी जानकारी जांच लें।
WhatsApp ग्रुप एडमिन भी रहें सतर्क
एसपी तेजस्वनी गौतम ने WhatsApp ग्रुप एडमिन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। प्रचार एवं चुनाव संबंधी WhatsApp ग्रुप में केवल भरोसेमंद सदस्यों को ही संदेश पोस्ट करने की अनुमति दें। ग्रुप सेटिंग में Only Admins विकल्प का उपयोग कर भ्रामक अथवा आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार की आशंका कम की जा सकती है।
चुनाव ड्यूटी में लगे कार्मिक निजी डिवाइस और Public Wi-Fi से बचें
चुनावी डेटा अथवा EVM/VVPAT से संबंधित संवेदनशील जानकारी किसी निजी डिवाइस या असुरक्षित नेटवर्क/Public Wi-Fi पर साझा नहीं करें। अनजान ई-मेल आईडी से प्राप्त चुनाव संबंधी सर्कुलर, लिंक अथवा अटैचमेंट को बिना सत्यापन के ओपन न करें।
ठगी होने पर ‘गोल्डन ऑवर’ में 1930 पर करें शिकायत
यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही नजदीकी पुलिस स्टेशन/साइबर पुलिस स्टेशन अथवा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है।
राजस्थान में उपलब्ध साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 एवं 9257510100, आपातकालीन पुलिस सहायता 100/112, पुलिस नियंत्रण कक्ष कोटा शहर 9530442777 तथा महिला एवं वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन 1090 पर भी सूचना देकर सहायता प्राप्त की जा सकती है।
पुलिस की अपील—सतर्क मतदाता ही सुरक्षित मतदाता
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि “सतर्क मतदाता ही सुरक्षित मतदाता है।” चुनाव संबंधी किसी भी सूचना पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करें। फर्जी वोटर लिंक, OTP, QR कोड, डीपफेक वीडियो और संदिग्ध संदेशों से सावधान रहें तथा साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।







