Tuesday, August 18, 2026
Screenshot_2026-02-16-14-04-33-20_6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

नसियां जी दादाबाड़ी में 20 अगस्त को रचे जाएंगे इतिहास के दो स्वर्णिम अध्याय

राजस्थान में पहली बार आचार्य विद्यासागर जी महाराज की संघ-परंपरा से मुनि दीक्षा

कोटा। श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी दादाबाड़ी में 20 अगस्त का दिन जैन समाज के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय जोड़ने जा रहा है। चातुर्मासरत ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि शिरोमणि श्री 108 योगसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में होने वाला जैनेश्वरी मुनि दीक्षा समारोह दो ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी बनेगा।

चातुर्मास कमेटी के संयोजक हुकम जैन काका व नसिया जी मंदिर के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि पहली बार राजस्थान की धरती पर संत शिरोमणि आचार्य भगवन्त श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की संघ-परंपरा से मुनि दीक्षा संपन्न होगी। वहीं दूसरी ओर मुनिश्री 108 योगसागर जी महाराज के कर-कमलों से प्रथम बार मुनि दीक्षा संस्कार संपन्न होने जा रहा है। यही दो उपलब्धियां इस समारोह को धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी प्रदान कर रही हैं।

छह ऐलक दीक्षाओं के बाद अब पहली मुनि दीक्षा

चातुर्मास कमेटी के संयोजक हुकम जैन काका, नसिया जी मंदिर के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ, महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि मुनिश्री योगसागर जी महाराज इससे पूर्व रक्षाबंधन के पावन अवसर पर रहली में छह ऐलक दीक्षाएं प्रदान कर चुके हैं। अब उनके सान्निध्य और कर-कमलों से प्रथम मुनि दीक्षा संस्कार होने जा रहा है। इस दुर्लभ अवसर को लेकर कोटा, हाड़ौती ही नहीं, बल्कि देशभर के जैन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और उमंग का वातावरण है।

6800 श्रद्धालुओं के लिए वाटरप्रूफ मंडप, मौसम की चुनौती का भी इंतजाम

चातुर्मास कमेटी के संयोजक हुकम जैन काका व नसिया जी मंदिर के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए आयोजन स्थल पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। समारोह के लिए तीन वाटरप्रूफ मंडप एवं पांडाल तैयार किए जा रहे हैं। लगभग 380 फीट × 54 फीट, यानी करीब 20,500 वर्ग फीट के इन मंडपों में लगभग 6,800 श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था रहेगी।

भोजन व्यवस्था के लिए भी बड़े वाटरप्रूफ पांडाल तैयार किए गए हैं, ताकि मौसम प्रतिकूल होने की स्थिति में भी श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। विशिष्ट अतिथियों, आगंतुकों एवं त्यागी-व्रतियों के लिए पृथक भोजन व्यवस्था की गई है। महिलाओं के लिए वातानुकूलित हॉल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

देशभर से कोटा पहुंचेंगे श्रद्धालु

कमेटी के संयोजक हुकम जैन काका ने बताया कि जैनेश्वरी मुनि दीक्षा का यह दुर्लभ अवसर केवल कोटा और हाड़ौती के लिए ही नहीं, बल्कि राजस्थान और देशभर के जिनभक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के प्रत्यक्ष साक्षी बनने के लिए कोटा पहुंच रहे हैं।

जो श्रद्धालु समारोह में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हो सकेंगे, उनके लिए सुधाकलश के माध्यम से लाइव प्रसारण की व्यवस्था की जा रही है। इसके जरिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में बैठे श्रद्धालु भी इस पुण्यमय अवसर के दर्शन कर सकेंगे।

आचार्यश्री विद्यासागर जी के व्यक्तित्व से प्रेरित रहे हैं क्षुल्लक संयमसागर जी महाराज

परम पूज्य क्षुल्लक श्री 105 संयमसागर जी महाराज संत शिरोमणि आचार्य भगवन्त श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के व्यक्तित्व, ज्ञान, करुणा और आध्यात्मिक जीवन से गहराई से प्रभावित एवं प्रेरित रहे हैं। आचार्यश्री के आदर्शों और आत्मकल्याण की प्रेरणा से संयम-पथ पर आगे बढ़ने का उनका संकल्प जैन समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।

पार्किंग से लेकर ई-रिक्शा तक की व्यवस्था

महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि पार्किंग से लेकर ई-रिक्शा तक की व्यवस्था

समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए यातायात और पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है। चार पहिया वाहनों तथा बाहर से आने वाली श्रद्धालुओं की बसों की पार्किंग दादाबाड़ी पुलिस थाने के पास चिल्ड्रन स्कूल के बाहर एवं राठौर छात्रावास में रहेगी।

पार्किंग स्थल से मंदिर परिसर तक की दूरी लगभग पांच मिनट की पैदल दूरी है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निःशुल्क ई-रिक्शा सेवा उपलब्ध रहेगी।

मंदिर के आसपास चार पहिया वाहन खड़ा करना निषिद्ध रहेगा।

दोपहिया वाहनों के लिए बॉयज हॉस्टल परिसर में पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यातायात व्यवस्था में सहयोग करें और निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें।

पूज्य 105 क्षुल्लक श्री संयम सागर जी महाराज का संक्षिप्त जीवन परिचय है

संक्षिप्त जीवन परिचय

– पूर्व नाम: रत्नाकर जी

– पिता का नाम: श्री अप्पासाहेब दुर्गे

– मां का नाम: सौ. त्रिशला देवी

– जन्म तारीख: 15-12-1987

– जन्म स्थान: मोलवाड़, जिला-बेलगाम (कर्नाटक)

– शिक्षा: (उत्तीर्ण 9वीं)

धार्मिक जीवन

– ब्रह्मचर्य व्रत: आजीवन – 22-4-2003, किन्नूर (कर्नाटक में)

ब्रह्मचर्य व्रत गुरु:-

आचार्य श्री जी से आचार्यश्री के व्यक्तित्व से प्रभावित रहे हैं

– 2003 चातुर्मास चिपरी में दूसरी प्रतिमा व्रत

– 2004 चातुर्मास में तीसरी प्रतिमा व्रत

– क्षुल्लक दीक्षा: 25-4-2008

– दीक्षा स्थान: सुखसागर धाम,कलभ्म्बी, जिन पंचकल्याणक में

– क्षुल्लक दीक्षा गुरु: परम् पूज्य 108 ज्येष्ठ मुनि श्री सुखसागर जी महाराज

विशेष

– दीक्षा के बाद 1 वर्ष मौन पालन

– मराठी, कन्नड़, हिन्दी अनेक भाषाओं के ज्ञाता

AD

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles