चम्बल में गिरने वाले गंदे नालों का हल पुख्ता करें -कलेक्टर
कोटा, अगस्त। राजस्थान आधारभूत नगरीय विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) परियोजना की योजना निर्माण प्रक्रिया में प्रभावी जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला कलक्टर पीयूष समारिया की अध्यक्षता में बुधवार को हितधारक परामर्श कार्यशाला ‘‘आरयूआईडीपी संवाद’’ का आयोजन कलेेक्ट्रेट सभागार में किया गया। संवाद कार्यक्रम में पांचवे चरण के तहत कोटा शहर एवं जिले के अन्य शहरों में होने वाले कार्यों के बारे में जानकारी दी गई।
जिला कलक्टर ने कोटा में प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि ऐसे कार्य प्राथमिकता से हाथ में लिए जाएं जो पूर्व की परियोजनाओं में नहीं हो सके। जिन क्षेत्रों में गैप बना हुआ है उन्हें पूरा किया जाए। कार्यों का निर्धारण जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ पूर्ण समन्वय रखते हुए किया जाए। उन्होंने चंबल नदी में गिरने वाले गंदे नालों की समस्या का हल प्रस्तावित परियोजना में पुख्ता तरीके से करने की बात कही। उन्होंने कहा कि गंदे नालों के पानी को उपचारित करके नदी में छोड़ने अथवा अन्य विकल्पों का अध्ययन कर कार्य योजना बनाई जाए। अर्बन मोबिलिटी के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शेल्टर बनाए जाएं। पर्यटन विकास के अंतर्गत प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों के रखरखाव एवं विकास संबंधी कार्यों को सुनियोजित तरीके से करने की योजना बनाई जाए। बाढ़ नियंत्रण, ड्रेनेज, वेस्टवाटर तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट इत्यादि के लिए भी क्षेत्र की आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुरूप सुविचारित तरीके से प्लान तैयार किया जाए।
इसके लिए डीपीआर बनने से पूर्व ही जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ निरंतर समन्वय रखा जाए।
नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा एवं निगम के अन्य अधिकारियों ने पूर्व की परियोजनाओं से वंचित रहे क्षेत्र एवं पूर्व के कार्यों की स्थिति की जानकारी देते हुए महत्वपूर्ण सुझाव रखे। स्वतंत्र पत्रकार एवं चंबल संसद के संयोजक बृजेश विजयवर्गीय ने भी महत्वपूर्ण सुझाव रखे। विजयवर्गीय ने सोलिंड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत चम्बल नदी को प्रदूषण मुक्त करने तथा ऐतिहासिक झाला भवन के संरक्षण की मांग की और कहा कि आर यू आईडीपी को इन योजनाओं पर विशेष प्रावधान रखना चाहिए यदि नहीं किया है तू तो सुझावों को शामिल करें
नगर निगम आयुक्त मेहरा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इवेलुएशन एक्सपर्ट के के शर्मा ने कार्यक्रम के रूपरेखा प्रस्तुत की एवं अतिथियों का स्वागत किया। कार्यशाला में पुलिस,केडीए,पीएचईडी, पीडब्ल्यूडी एवं अन्य विभागों, संबंधित संगठनों एवं हितधारकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
पांचवें चरण में कोटा में होंगे 945.45 करोड़ के कार्य
आर यू आईडीपी के पांचवें चरण में कोटा जिले में 945.45 करोड़ की लागत के कार्य प्रस्तावित हैं जिनमें से अकेले कोटा शहर में 927.27 करोड़ लागत के कार्य कराए जाएंगे। कोटा शहर के अलावा सांगोद, रामगंज मंडी व कैथून को भी पांचवें चरण में शामिल किया गया है।
आर यू आईडीपी के सहायक अभियंता कुश कुमार ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि
वेस्टवाटर मैनेजमेंट कार्य 394.15 करोड की लागत से किए जाएंगे। फ्लड मैनेजमेंट अंतर्गत 57.55 करोड़ के कार्य प्रस्तावित हैं जिनमें कोटा शहर में 53.40,सांगोद में 0.97,रामगंज मंडी में 2.06 तथा कैथून में 1.12 करोड़ के कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। कमांड एंड कंट्रोलिंग सेंटर, हेरिटेज एवं टूरिज्म क्षेत्र में कोटा में 74.79, सांगोद में 1.36, रामगंजमंडी में 2.89 तथा कैथून में 1.56 करोड लागत के कार्य किए जाएंगे। अर्बन मोबिलिटी के क्षेत्र में कोटा में 299. 17 तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अंतर्गत कोटा में 105.76, सांगोद में 1.92, रामगंज मंडी में 4.09 तथा कैथून में 2.21 करोड़ की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं।
प्रदेश के 84 शहरों का होगा विकास
राज्य सरकार प्रदेश के 84 शहरों में पांचवें चरण के कार्य जल्द ही शुरु करने की तैयारी कर रही है। इन शहरों को 9500 करोड़ रुपए की लागत से स्मार्ट व सस्टेनेबल बनाया जायेगा। पांचवे चरण में अपषिष्ट जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी यातायात सुधार, बाढ़ प्रबंधन/जल निकासी कार्य, विरासत संरक्षण एवं पर्यटन, कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सेंटर आदि क्षेत्रों में शहरों का विकास किया जायेगा।







